राजनीति के गंदे खेल में महापर्व छठ को तो बख्श दो

राजनीति का कीचड़ देखें: सुशील मोदी बनाम तेज़स्वी यादव

बिहार में राजनीति की गंदगी ने महापर्व छठ को भी अपने में लपेट लिया है | हर समय और मौके को राजनीति का ओढ़ना- बिछौना बनाने वाले राजनीतिज्ञों ने बिहार की शुचिता और समरसता से जुड़े महापर्व छठ को भी अपने सियासी टंटे का औज़ार आखिरकार बना ही दिया | मामला प्रदेश के वर्तमान उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के ट्विट और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेज़स्वी यादव के जवाबी ट्विट से जुडा है, इस महापर्व के बहाने ऐसी-ऐसी बातें कहीं गयीं कि एक आम बिहारी भी शर्मसार हो गया होगा |

भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी का आपत्तिजनक ज्ञान पहले सुनिए...वो फरमाते हैं “ करोड़ों रूपये के माल, मिट्टी और जमीन घोटाले में फंसने पर जिनके बेटों ने तंत्र-मन्त्र और वास्तुदोष निवारण के नाम पर करोड़ों रूपये पानी की तरह बहाये, उनकी माताश्री राबड़ी देवी अब संकट से मुक्ति के लिए छठ करने की दुविधा में हैं| यह ऑफिसियल ट्विट की भाषा बेहद अपमानजनक और उकसानेवाली है | सुशील मोदी जैसे वरिष्ठ नेता से कम से कम ये उम्मीद तो बिहार को नहीं ही रही होगी | महापर्व पर एक एक शब्द सोच समझकर बोला जाता है | यह किसी जाति या दल से सम्बद्ध नहीं है | इस महापर्व से करोड़ों बिहारियों की श्रद्धा जुडी है | भाजपा के भी कई नेताओं ने इस भाषा को अशालीन बताया है |

इस आपत्तिजनक ट्विट के जवाब में पूर्व उपमुख्यमंत्री तेज़स्वी ने तो फिर भी संयम का परिचय दिया | उन्होंने ट्विट किया कि छठ मैया पर आपकी टिप्पणी आपके छिछोरापन, छठ मैया के प्रति आपकी घोर घृणा,अपमान और ओछी मानसिकता का परिचायक है | तेज़स्वी ने फिर भी शालीनता बरती लेकिन उनके दल के कई अन्य विधायक कहां चुप बैठने वाले थे ! उनलोगों ने सुशील मोदी की इसाई पत्नी श्रीमती जेसी जार्ज पर ऐसे ऐसे ट्विट किये कि छठ मैया तक कराह उठीं होंगी | यहाँ तक कहा गया कि इसाई जेसी जार्ज और उनकी माँ जी को अगल- बगल खड़ा कर देख लो कि कौन कितनी धार्मिक हैं ! मोदी को विधर्मी और छठ पर ज्यादा ज्ञान न देने की चेतावनी तक दी गयी |

काश ! बिहार और महापर्व को कलंकित करने वाले नेताओं को छठ मैया सद्बुद्धि देतीं | क्या राजनीति के शीर्ष पदों पर रहनेवाले लोगों की यही भाषा उन्हें उपहास का पात्र नहीं बनातीं | ऐसे में हमारी यही अपील है कि राजनीति की मर्यादा खत्म करने वालो कम से कम महापर्व छठ की मर्यादा तो रहने दो |

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