Shivsena, BJP गठबंधन बचाने की हो रही आखिरी कोशिश

पिछले दिनों शिवसेना और बीजेपी के बीच बढ़ती तल्खियों के बीच ऐसा लगा था कि दोनों दलों के रिश्ते टूटने वाले हैं, देखा जाय तो शिवसेना के शीर्ष नेतृत्व ने खुलेआम मंच से इसकी घोषणा भी कर दी थी। लेकिन इस बीच ऐसी खबर आ रही है कि दोनों दल गठबंधन बचाने की एक और कोशिश कर रहे हैं। अगर दोनों पार्टियों के बीच गलतफहमियां दूर हो गईं तो दोनों फिर साथ हो सकती हैं। कहा जा रहा है कि पिछले हफ्ते शिवसेना और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच गठबंधन बनाए रखने पर बातचीत फिर से शुरू हुई। इस बातचीत में खास बात यह है कि इसके लिए नए वार्ताकारों को नियुक्त किया गया और दोनों दलों के आक्रामक रवैया रखने वाले नेताओं को इस वार्ता से दूर रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक नए वार्ताकार दोनों पार्टियों के बीच उभरे मतभेदों और सीटों के मुद्दे को सुलझाएंगे तो वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे कामकाजी मुद्दों पर फैसला करेंगे।

मिली जानकारी के अनुसार शिवसेना ने वार्ताकार के रूप में उन नेताओं को चुना है जो पर्दे के पीछे रहकर पार्टी का कामकाज देखते हैं। शिवसेना के एमपी अनिल देसाई ने हाल ही में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी मुलाकात की थी। देसाई के अलावा पार्टी के नवनियुक्त सचिव मिलिंद नारवेकर भी दोनों पार्टियों के बीच सूत्राधार का काम कर रहे हैं। हालांकि संजय राउत और राज्य के परिवहन मंत्री दिवाकर राउते को इस बातचीत से अलग रखा गया है। वहीं भाजपा की ओर से दन्वे के अलावा राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुंगंतिवार, शिक्षा मंत्री विनोद तावडे और पीडब्ल्यूडी मंत्री चंद्रकांत पाटिल वार्ता में शामिल हैं।

जबकि एकनाथ खडसे और आशीष शेलार को इससे दूर रखा गया है। गठबंधन पर फिर से बातचीत शुरू होने पर शिवसेना का कहना है कि हम चाहते हैं कि गठबंधन टूटना नहीं बल्कि काम करते रहना चाहिए लेकिन यह समान शर्तों के आधार पर होना चाहिए। बता दें कि शिवसेना ने पिछले माह घोषणा की थी कि वह अगला विधानसभा और लोकसभा चुनाव अकेली लड़ेगी।

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