भूमि पुत्र क्रशर मालिक परेशान भाग 2

मनोज कुमार सिंह
राजनीति गुरु डॉट कॉम ने प्रशासन द्वारा संथाल परगना के क्रशर मालिकों का लगातार किए जा रहे दमन और दुर्दशा के सवाल को उठाया था। आश्चर्य की बात यह है किसी भी राजनीतिक दल ने इस गंभीर विषय पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

प्रशासन ने जो कार्रवाई की है, उसकी जमीनी हकीकत का पड़ताल जब किया गया तो पता चला कि जब भी साहेबगंज पाकुड़ और दुमका के DC का तबादला होता है, उसके तुरंत बाद सबसे पहली कार्रवाई मांइस कारोबारियों को झेलनी ही पड़ती है। उपायुक्त खनन विभाग के पदाधिकारी को बुलाकर विभाग की समीक्षा करते हैं और यह जानने का प्रयास करते हैं कि किस क्रशर मालिक का पेपर अधूरा है उसके बाद उनका मौखिक निर्देश आता है की क्रशर को अविलंब बंद कर दिया जाए। क्रशर एसोसिएशन के लोग दौड़े भागे खनन पदाधिकारी के ऑफिस का चक्कर लगाने लगते हैं और उसके बाद तोल-मोल करके नए हाकिम का नया रेट तय होता है और फिर काम चालू हो जाता है। इसी क्रम में कुछ ऐसे उपायुक्त भी आ जाते हैं जो अपनी मनमर्जी से माइंस लीज देना बंद कर देते हैं अथवा कुछ तकनीकी आधार पर कमी दिखा कर फाइल को दबा देते हैं। समझ में नहीं आता है की इस अराजकता के पीछे पदाधिकारियों की मंशा क्या है। लेकिन हर हाल में संथाल परगना के भूमि पुत्रों का एकमात्र व्यवसाय धीरे-धीरे तबाह हो रहा है और इनकी आवाज को उठाने वाला कोई नहीं है। हजारों लोगों का रोजगार बंद हो चुका है। यहां तक की क्षेत्र के नौजवान बैंक से लोन लेकर रोजी रोटी कमाने की लालसा में लोन के चक्रव्यूह में फंस कर जगह जमीन बेचने पर मजबूर हो रहे हैं। मजदूरों का क्षेत्र से पलायन हो रहा है।
आये दिन पाकुड़, बरहरवा, तीनपहाड़, साहेबगंज रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मजदूर कमाने के लिए केरल, मुंबई ,दिल्ली और पंजाब की ओर चले जा रहे हैं।
स्थानीय नीति और नियोजन नीति पर भाषण देने वाले संथाल परगना के सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता इन भूमि पुत्रों की बर्बादी पर धृतराष्ट्र बने हुए हैं। राज्य के आला अफसर भी चुपचाप तमाशा ही देख रहे हैं। कहा जाता है कि "जब पेट की आग दिमाग तक पहुंच जाती है उसी वक्त एक नई क्रांति अपना स्वरूप लेने लगती है" कहीं ऐसा ना हो की भूमि पुत्र क्रशर मालिक अपनी तबाही से तंग आकर व्यवस्था के विरुद्ध करो या मरो का बिगुल फूंक दें।
वक्त की जरूरत है कि मृतप्राय और बर्बाद हो रहे पत्थर उद्योग को बचाने के लिए सरकार द्वारा समेकित कदम उठाया जाय और सिंगल विंडो सिस्टम के तर्ज पर जिला स्तरीय टास्क फोर्स बनाकर उनकी समस्या का समाधान किया जाए।

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