लालू के आते ही शुरू हो गए जेल के कायदे-कानून

राजद सुप्रीमो लालू यादव चारा घोटाले के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। लाजिमी है कि लालू यादव से मिलने के लिए उनके समर्थक, शुभचिंतक और पार्टी के नेता बेताब हैं। लेकिन जेल प्रशासन ने सख्ती दिखायी है और लालू से मिलने-जुलने पर कड़ाई कर दी है। बता दें कि गत रविवार को भी राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह सहित कई नेताओं ने जेल गेट पर इसको लेकर हंगाम किया था पर डीसी ने यह कह कर इनकार कर दिया था कि रविवार को जेल मैनुअल के हिसाब से कोई नहीं मिल सकता है।

इधर राजद नेता अन्नपूर्णा देवी ने भी मांग की है कि लालू के परिजनों को प्रतिदिन उनसे मिलने की इजाजत मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लालू जननेता हैं कोई उग्रवादी या आतंकवादी नहीं कि उनसे मिलने की इजाजत में इतनी परेशानी होनी चाहिए। उनका स्वास्थ्य खराब रहता है तो इस आधार पर प्रतिदिन एक परिजन को उनसे मिलने की इजाजत मिलनी चाहिए।

जबकि बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के जेल अधीक्षक एके चौधरी का कहना है कि सबके लिए नियम कानून बराबर हैं। सप्ताह में तीन लोग ही किसी भी कैदी से मिल सकते हैं और मिलने की अवधि पंद्रह मिनट की हो सकती है। उन्होंने कहा कि नियम के अनुसार सभी कैदी जेल प्रशासन के लिए समान हैं। सबको एक जैसी सुविधा दी जाती है और जो भी नियम के अनुकूल होगा जेल प्रशासन उसके अनुसार ही काम करेगा। जेल प्रशासन के इस रुख से राजद नेताओं ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि अधिकारियों का रवैया पक्षपातपूर्ण है।

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