पद्मावती पॉलिटिक्स से बिहार का क्षत्रिय पारा चढ़ा

फिल्म पद्मावती ने बिहार और झारखण्ड के राजपूताने का सियासी पारा गर्म कर दिया है। फिल्म में विदेशी लुटेरे खिलज़ी और रानी पद्मावती के रोमांस पर राजस्थान से बिहार और झारखण्ड तक की क्षत्रिय राजनीति गर्म है। आनंद मोहन के जेल में होने की वज़ह से कोई तोड़ फोड़ कार्यक्रम तो अब तक नहीं हुआ है लेकिन प्रदेश के बड़े भूमिहार नेता गिरिराज सिंह ने जरुर फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की लानत मलामत की और इतिहास से की गयी छेड़ छाड़ पर उनकी भर्त्सना की थी। क्षत्रिय समाज के कई अन्य संगठन अधिकारियों ने भी बिहार में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है।

भाजपा नेता उपेन्द्र चौहान ने कहा कि संजय लीला भंसाली आग से खेलने की कोशिश कर रहे हैं। चौहान ने कहा कि चितौरगढ़ की रानी पद्मावती ने महिलाओं के सम्मान और राजपुताना आन-बान और शान को लेकर जौहर किया था यानी अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने कहा कि ऐसे स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक रानी पद्मावती के साथ फिल्मकार बेहद गलत ट्रीटमेंट कर रहे हैं और बिहार का क्षत्रिय समाज इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

ऐसे भी इस फिल्म को लेकर विवाद दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, बिहार के अलग-अलग हिस्सों में विरोध के स्वर बुलंद हो रहे हैं। सोनपुर में क्षत्रिय समाज के प्रमुख विनोद सिंह ने एलान किया है कि इस इलाके में फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने देंगे।

वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती के साथ विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल जैसे कई दक्षिणपंथी संगठनों ने पहले ही पद्मावती के प्रदर्शन को लेकर इसके निर्माताओं को कड़ी चेतावनी दी है, ऐसे में इस फिल्म को लेकर लगातार सियासी माहौल गर्म हो रहा है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है पर राज्य सरकारों को क़ानून व्यवस्था के मद्दे नज़र कोई फैसला तो करना ही होगा। इस मुल्क में आखिरकार कला से बड़ी तो राजनीति ही है ना।

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