खूंटी गैंग रेप,चर्च और पत्थलगड़ी का पॉलिटिकल कॉकटेल

खूंटी गैंग रेप में सिस्टम की भयावह संवेदनहीनता चौंकाने वाली है. सिविल सोसाइटी की मानें तो अगर दूसरे प्रदेशों में यह घटना होती तो शायद सरकार गिर जाती. सोये समाज को अपने नुक्कड़ नाटक के जरिये जगाने गयी सामाजिक कार्यकर्ताओं पर घृणित और वीभत्स यौनिक हमला हुआ. लेकिन शुरू से शासन का रवैया ऐसा रहा जैसे उसकी दिलचस्पी इस मामले को दबाने में है. पीड़ितों को छुपा कर रखा गया, परिजनों तक को भी उनसे नहीं मिलने दिया गया, मीडिया से सच छुपाने की कोशिश की गयी. आखिर क्यों ! क्या असली अपराधियों को बचाने के लिए ऐसा किया गया. इस मामले में एक उग्रवादी संगठन का भी नाम आया, फिर अचानक से जांच की दिशा चर्च और पत्थलगड़ी समर्थकों की ओर मुड़ गयी. क्या जानबूझकर कोई सियासी कॉकटेल बनाया जा रहा है ! सरकार का जो रवैया रहा है वह काफी चौंकाने वाला है। एक तरफ तो सरकार यह कहती है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। जल्द ही सबों को पकड़ लिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर उसकी कार्यशैली से ऐसा लगता है कि सरकार शुरू से ही मामले को रफा-दफा करने और दबाने की कोशिश कर रही है। पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली शुरुआत से ही संदिग्ध रही है। घटना की जानकारी होने के बावजूद गैंग रेप पीड़ित 5 लड़कियों को मीडिया के सामने नहीं लाया जा रहा था जबकि प्रशासन को यह बात अच्छी तरह से पता था कि उनके साथ दुष्कर्म किया गया है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की नारा देने वाली सरकार में हुई इस दरिंदगी का कितना असर हुआ है यह राज्य के डीजीपी के बयान से समझा जा सकता है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का व्यक्तव्य देने की जगह पर वो कहते हैं कि ‘तू लोग चाय नाश्ता कर और मस्त रह ‘किसी राज्य का पुलिस कप्तान अगर ऐसी भाषा का प्रयोग करें तो उस राज्य की कानून व्यवस्था कैसी होगी यह अपने आप समझा जा सकता है। राजधानी दिल्ली में ऐसी ही वारदात हुई तो सरकार जाते-जाते बची थी जबकि सरकार ने आरोपियों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की थी। झारखंड में स्थिति ठीक उलट है पुलिस आरोपियों को तो नहीं पकड़ पाई है लेकिन सभी गैंग रेप पीड़ित सभी लड़कियों को कस्टडी में रखी हुई है। सरकार ने मामले को शुरु से ही इतना उलझा दिया कि इस संवेदनशील मुद्दे से सबों का ध्यान भटक जाए और पत्थलगड़ी की ओर चला जाए। जबकि इस गैंगरेप की घटना का पत्थलगड़ी से कोई लेना-देना नहीं है।
अब पुलिस- प्रशासन के रवैये पर सवाल उठने लगे हैं कि उसने शुरुआत में ही मामले को दबाने की क्यों कोशिश की क्या वह घटनास्थल पर जाने में डरती थी या उस इलाके में कार्रवाई करने से बचना चाहती थी क्योंकि कुछ महीने पहले वहां 400 से अधिक जवानों को पत्थलगड़ी समर्थकों ने बंधक बना लिया था।
खूंटी गैंग रेप को लेकर जिस प्रकार सरकार कोचांग में जहां पांच लड़कियों के साथ बंदूक की नोक पर गैंगरेप किया गया। वहां पहुंचने में ही पुलिस को पसीने छूट गए।
पुलिस का बयान भी इस मामले को लेकर लगातार बदलता रहा और अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी आदिवासी गांवों में चलने वाले पत्थलगड़ी आंदोलन से संबंधित हैं। घटना को अंजाम देने वाले अपराधी भी पत्थलगड़ी में शामिल रहे हैं।
पुलिस का मानना है कि दुष्कर्म मामले में कोचांग क्षेत्र के एक चर्च के फादर अल्फांसो की भूमिका संदिग्ध है। इसके साथ ही इसमें चर्च की भूमिका को लेकर भी कई बातें कही गई हैं। उसने सभी पीड़ितों को कहा कि जो हुआ है उसे भूल जाएं और इसे पुलिस को बताने पर उनकी जान को खतरा हो सकता है। पुलिस का कहना है कि पत्थलगड़ी के पीछे भी चर्च के लोगों का हाथ है और वही भोले-भाले लोगों को बहला-फुसला कर सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं। पुलिस के अधिकारियों की मानें तो फादर अल्फांसो ने पीड़िताओं से अपराधियों के साथ जाने को कहा था। साथ ही यह भी कहा था कि वे उन्हें कुछ समय बाद छोड़ देंगे।
हालांकि अल्फांसो ने अपराधियों से स्कूल में कार्यरत दो नन को छोड़ने को कहा था। जबकि अल्फांसो का कर्तव्य था कि वह मामले की सूचना पुलिस को देते लेकिन उन्होंने इसे दबाने की कोशिश की।

पीड़िताओं पर रहस्यमय चुप्पी..

पुलिस का कहना है कि आदिवासी लड़कियों से गैंगरेप की घटना नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) और पत्थलगड़ी के लोगों की साजिश का परिणाम है। ये लोग एनजीओ के नुक्कड़ नाटक के जरिए फैलाई जा रही जागरूकता और अपने प्रतिबंधित इलाके में आने से नाराज थे। इसके चलते आरोपी मिशनरी स्कूल में होने वाले कार्यक्रम में आ धमके और लड़कियों को नजदीक स्थित जंगल उठा ले गए। यहां पत्थलगड़ी का शीर्ष कमांडर जॉन जोहानस टीडू कई पीएलएफआई के नक्सलियों के साथ इन्हें सबक सिखाने के लिए पहले से बैठा हुआ था।
खूंटी गैंग रेप के आरोपियों की गिरफ्तार करने के लिए जैसे पुलिस ने खूंटी में अभियान चलाया इस पूरे मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब सांसद करिया मुंडा के निवास पर हमला बोलकर पत्थलगड़ी समर्थकों ने उनके तीन अंगरक्षकों को हथियार समेत अपहृत कर लिया। हालांकि बाद में उन्हें सुरक्षित बरामद कर लिया गया। लेकिन इसको लेकर पुलिस को भारी संख्या में फोर्स लगानी पड़ी और पूरा फोकस अपहृत जवानों की ओर शिफ्ट हो गया।
उस पूरे प्रकरण में एक और व्यक्ति का नाम पुलिस लेती रही है और उनका कहना है कि रेप के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में वह बड़ा रोड़ा बना हुआ है वह है पत्थलगड़ी का स्वयंभू नेता युसूफ पूर्ति। पुलिस ने उसके खिलाफ भी गिरफ्तारी वारंट जारी कर उसके घर की कुर्की की है पर अभी भी वह पुलिस की गिरफ्त से दूर है।
भाजपा नेताओं की मानें तो राज्य सरकार की विकास की नीति के खिलाफ कुछ उग्रवादी तथा स्थानीय ईसाई मिशनरियां एकजुट होकर स्थानीय आदिवासियों को भड़का रही हैं और खूंटी में गांवों के बाहर पत्थल गाड़ कर उस पर स्थानीय प्रशासन के प्रवेश को निषिद्ध करने की बात लिख रही हैं। प्रशासन के लोगों के गांवों के भीतर जाने पर ये गुंडे गरीब आदिवासियों को एकजुट कर उन पर हमला कर देते हैं। इन्हीं पत्थलगड़ी समर्थकों और ईसाई मिशनरी के लोगों ने मिलकर 19 जून को खूंटी में एक ईसाई मिशनरी में नुक्कड़ नाटक कर रहे समूह की पांच युवतियों का अपहरण कर उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और अप्राकृतिक यौनाचार किया। पुलिस ने जब मामले में मिशन के एक पादरी समेत तीन अपराधियों को गिरफ्तार किया है और छह अन्य की तलाश कर रही है तो इसाई मिशनरियों ने इस नृशंस कांड पर चुप्पी साध रखी है।
पुलिस की मानें तो सामूहिक दुष्कर्म की पूरी साजिश पत्थलगड़ी समर्थक नेता जॉर्ज जोनास किड़ो ने रची थी। क्योंकि पत्थलगड़ी वाले क्षेत्र में ये युवतियां जागरुकता फैलाने का काम कर रही थीं, जो पत्थलगड़ी समर्थकों को नहीं भाया और उनको सबक सिखाने के लिए इस घिनौने करतूत को अंजाम दिया गया। इस कांड के लिए उसने पीएलएफआई के उग्रवादियों की मदद ली और घटना को अंजाम देने का जिम्मा भी उग्रवादियों को दिया।
वहीं दूसरी ओर एक ग्रामसभा को संबोधित करते हुये पत्थलगड़ी समर्थक नेता जॉर्ज जोनास किडो ने पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुये अपने आप को निर्दोष बताया है और कहा कि पत्थलगड़ी से आदिवासी एकजुट हो रहे हैं, जिससे डर कर सरकार ने साजिश के तहत पत्थलगड़ी समर्थकों को फंसाया है।

 

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