भाजपा को उसी के अंदाज में जवाब देने की तैयारी में झामुमो

झारखंड में भाजपा ने अभी से ही सियासी पारा तेज कर दिया है। जिसे तेजी से राज्य में भाजपा मिशन 2019 की मुहिम में जुटी है। उसने झामुमो सहित अन्य दलों को भी चुनावी मोड में ला दिया है। जहां एक ओर कांग्रेस अपने संगठन को मजबूत करने में लगी है। वहीं झामुमो ने भी जिला स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलनों का आयोजन कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। वैसे भी झारखंड में झामुमो ही मुख्य विपक्षी दल है। इस नाते झामुमो का तेवर में आना स्वाभाविक है। झामुमो के शीर्ष नेतृत्व ने केंद्रीय समिति की बैठक बुलाई है। इस बैठक में भाजपा की रणनीति से कैसे लोहा लिया जाय इसकी तैयारी की जाएगी। उधर, रघुवर सरकार अपने 1000 दिन पूरा करने का जश्न मनाने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर भी पार्टी के नेताओं कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी जाएगी।

जानकारों की मानें तो झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन और कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की मौजूदगी में अरसे बाद हो रही संगठनात्मक बैठक का एजेंडा पार्टी महाधिवेशन में तय होगा। पार्टी राज्य की उन सभी राजनीतिक परिस्थितियों और चुनौतियों पर मंथन करेगी जो उसके लिए महत्वपूर्ण हैं। धर्मांतरण बिल, अधिग्रहण बिल जैसे कई मुद्दों पर भाजपा का आक्रामक रुख झामुमो के लिए खतरा बन सकती है। वहीं बार- बार भाजपा का झामुमो की गढ़ में सेंध लगाने की कवायद में जुटी है। भाजपा का संतालपरगणा पर विशेष फोकस है पार्टी अक्सर कार्यक्रमों का आयोजन इस इलाके में करती है इसका सिर्फ यही मकसद है कि झामुमो को किसी भी तरह कमजोर किया जाय। इसी क्रम में 22 सितंबर को मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने 1000 दिनों की उपलब्धियों का पिटारा जनता के सामने खोलेंगे।

झामुमो का शीर्ष नेतृत्व भाजपा के हमालावर तेवर को ठीक-ठीक समझ रहा है। इसलिए धीरे-धीरे अपने पुराने तेवर और मूल मुद्दे और वोट बैंक की ओर लौटने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। झामुमो शुरू से ही जल, जंगल और जमीन की बात करती रही है। सीएनटी –एसपीटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ झामुमो का आक्रामक तेवर अंततः कामयाब रहा और सरकार को फैसला वापस लेना पड़ा। झामुमो के पास सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दे हैं और अब वह धुआंधार वार करने की तैयारी कर रही है।

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