किस मुग़ालते में है जेएमएम

जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिशन 2019 की तैयारी में जी-जान से जुट जाने को कहा है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा की जेएमएम अगला चुनाव अपने दम पर लड़ेगी. लोकसभा हो या विधान सभा का चुनाव हर सीट पर दमदार तरीक़े से चुनाव में उतारा जाएगा. इसके लिए बूथ स्तर पर पार्टी को मज़बूत करने का काम किया जा रहा है. पार्टी ने तय किया है कि अब बिना किसी अन्य दल से गठबंधन किए सभी सीटों से उम्मीदवार उतारा जाएगा.

जेएमएम नेता ने कार्यकर्ताओं से कहा कि मिशन 2019 का आग़ाज़ हो चुका है, चलो गांव की ओर, खोलो सरकार की पोल के तहत सरकार की जनविरोधी नीतियों को जनता के समक्ष रखें.

जेएमएम नेता इस एकला चलो नीति पर कब तक बने रहते हैं ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा. लेकिन जिस प्रकार भाजपा ने जेएमएम को उसके अपने परम्परागत क़िले में घेरा है. उससे तो यही अन्दाज़ा लगाया जा सकता है कि अगला चुनाव जेएमएम यदि अपने दम पर लड़ेगी तो रिज़ल्ट उसकी उम्मीद के ठीक उलट भी हो सकते हैं. देखा जाय तो 2014 के लोकसभा और विधान सभा चुनाव के बाद भाजपा ने संथाल परगना इलाक़े में सियासी गणित पर विशेष रणनीति बनायी है. इसी दिशा में पहल करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कई केंद्रीय मंत्री और ख़ुद मुख्यमंत्री ने जेएमएम के गढ़ में धुआंधार दौरा किया है. भाजपा के अंदर खाने ये बात चल रही है कि इस बार हेमंत सोरेन और शिबू सोरेन को उनके घर में ही घेरना है.

इन सब के बीच जेएमएम नेता अगर चुनाव में अकेले क़िस्मत आज़माने के मूड में है तो भाजपा के बनाए चक्रव्यूह में फ़ंसने की गुंजाइश बनती दिख रही है. बहरहाल, राजनीतिक पार्टियां हमेशा विकल्प खुला रखती हैं. और ऊंट कब किस करवट बैठेगा ये आने वाला वक़्त बताएगा.

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