निर्मल के बहाने कुरमी वोट पर दंगल

चुनाव की तारीख जैसे- जैसे नजदीक आ रही है। राजनीतिक दलों के बीच शह मात का खेल शुरू हो गया है। होड़ लगी है कि कैसे अपना सियासी समीकरण मजबूत किया जाये। अपने किले की घेराबंदी और दूसरों के वोट बैंक की सेंधमारी शुरू हो गयी है।

ताजा मामला निर्मल महतो की प्रतिमा को लेकर छिड़े सियासी घमासान की है। जानकारों की मानें तो सारे फसाद की जड़ कुरमी वोट बैंक को हथियाने की है। मूर्ति के बहाने झामुमो और आजसू आमने- सामने हैं। देखा जाय तो जेल चौक पर दिवंगत झामुमो नेता निर्मल महतो की प्रतिमा झामुमो ने ही लगायी थी। इधर, कुछ रोज पहले आजसू ने अचानक एलान किया कि झारखण्ड आंदोलन के कद्दावर नेता का क्षतिग्रस्त मूर्ति बदलकर वो नया मूर्ति लगायेगी। इसकी भनक मिलते ही झामुमो नेता सक्रिय हो गए, आनन-फानन में सड़क पर उतर गये और आजसू के इस राजनीतिक पैंतरे का खुल कर विरोध शुरू कर दिया।

दरअसल, झामुमो नहीं चाहती की उसके कुरमी वोटबैंक पर आजसू डाका डाले। उधर, आजसू प्रमुख खुद कुरमी ठहरे सो अपनी जाति को गोलबंद करने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। ध्यान रहे कि झारखण्ड में लगभग हर विधानसभा सीट में कुरमी वोटर की ठीक-ठाक तादाद है जबकि कुछ ऐसे सीट हैं जहां उनकी ताकत निर्णायक है।

कुल मिलाकर झारखण्ड की राजनीति में कुरमी किसी भी राजनीतिक दल की किस्मत बदलने का माद्दा रखते हैं। लिहाजा, आदिवासी, मूलवासी की बात करने वाली झामुमो के लिए यह वोट बैंक काफी अहम है। वह अच्छी तरह से जानती है कि इस जाति पर पकड़ रखने वाली कोई भी पार्टी मैदान मार सकती है। आगे स्थितियां चाहे जो भी हों पर फिलहाल तो आजसू के तेवर ने तो झामुमो की निंद जरूर उड़ा दी है।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *