शराब पर सुलगने लगी झारखण्ड की सियासत

नीतेश

झारखण्ड में शराब की सियासत गर्म है. प्रदेश में एक तरफ रघुवर सरकार खुद शराब बेचने की तैयारी कर रही है, वहीं उनकी पार्टी के कई मंत्री और विधायक शराबबंदी का समर्थन कर रहे हैं. बीजेपी के अंदर भी कोई खुलकर बोल रहा है तो कोई ऐसा बोल रहा है जो ये समझाने के लिए काफी है कि इनकी मंशा क्या है.
विपक्ष भी खुद शराब बेचने पर आमादा राज्य सरकार की नीयत में खोट देख रहा है. नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने तो शराबबंदी पर आर-पार का ऐलान कर दिया.
झारखण्ड के मंत्री सरयू राय ने तो खुलकर शराबबंदी की वकालत की. उन्होंने कैबिनेट की बैठक में ही कह डाला कि शराब बेचना सरकार का काम नहीं है. मंत्री अमरबाउरी ने कहा कि वो खुद शराब नहीं पीते, उनका कहना है कि जो गरीब शराब बेचते हैं, उनकी रोज की कमाई दो से तीन सौ रुपया होती है। लेकिन शराब के चक्कर में वे अपना पैसा पीकर बर्बाद कर देते हैं। घर की महिलाएं इससे खासी परेशान होती है। ऐसे में शराब पूरी तरह से बंद हो, मैं इसके पक्ष में हूं.
बीजेपी के विधायक लक्ष्मण टुडू भी कह रहे हैं कि इसे पूरी तरह से बंद कर देना चाहिये. बीजेपी विधायक बिमला प्रधान ने भी सरकार से आग्रह किया है कि इसे पूरी तरह से बंद कर दिया जाये। शराब के उपयोग से हमारे युवा रास्ता भटक रहे हैं.
लेकिन हमने शराब की सियासत के कुछ ऐसे अफसाने पता किये जो सत्ता के गलियारे में इन दिनों खूब बज रहे हैं. ऑफ द रिकॉर्ड एक्साइज विभाग के अधिकारी बता रहे हैं कि विबरेज कारपोरेशन के जरिए शराब बेचने के खेल के पीछे बड़ा शराब माफिया है. एक्सपर्ट बताकर इसी माफिया के जरिए झारखण्ड में मनमानी कीमत पर बिकेगी शराब. उत्तरप्रदेश चुनाव के बहाने यह सिंडिकेट कई महीनों से फैसला करवाने में जुटा था.
इस खेल का पता लगते ही प्रदेश में सियासी पारा गर्म हो गया है. अब आनेवाले दिनों में यह खेल कौन सा रंग दिखाएगा यह देखना बेहद दिलचस्प होगा.

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