झारखण्ड में स्पीकर नाराज़, सरकार बदहवास

-सरकारी आवास और अन्य सुविधायें छोड़कर विधानसभा अध्यक्ष ने बढ़ा दिया है दवाब

रास्ता निकालने मुख्यमंत्री गए दिल्ली

झारखण्ड विधानसभा का बजट सत्र 17 जनवरी से शुरू हो रहा है लेकिन इस बीच स्पीकर और सीएम के बीच चल रहा गतिरोध अब नए मोड़ ले रहा है. एक सप्ताह पहले से अपना सरकारी आवास और स्टाफ छोड़कर स्पीकर ने गुस्से का इज़हार सार्वजनिक कर दिया है. उन्हें मनाने की तमाम कोशिशें बेकार हुई. ऐसे में सरकार बदहवास हो रही है. सामने सत्र है, इस दौरान थोड़ी भी ऊँच-नीच सबपर भारी पड़ सकती है. ऐसे में 16 जनवरी को मुख्यमंत्री का दिल्ली जाना कई सवाल खड़े कर रहा है.

ऐसी नौबत क्यों आयी! राजनीतिक जानकार बताते हैं कि झारखण्ड की सत्ता के दो महत्वपूर्ण केन्द्रों का टकराव शुभ संकेत नहीं है. वह भी तब, जब जेवीएम से भाजपा आये 6 विधायकों पर तलवार लटक रही है. मामला स्पीकर के कोर्ट में है. इन विधायकों की ओर से विधान सभा अध्यक्ष की कोर्ट में अब तक हाज़िर किए गए गवाह से क्रॉस एग्जामिनेशन हो चुका है. स्पीकर कईयों को फटकार भी लगा चुके हैं. विधानसभा के पिछले सत्र में जिस तरह सीएम और स्पीकर के बीच गरमा गर्म बहस जैसा दृश्य भी सभी ने देखा.

स्पीकर के कड़े रुख को देखते हुए जेवीएम से भाजपा में आये सभी विधायक दिल्ली भी गए. जहां से उन्हें आश्वासन मिला. बीच में खबर आई कि दिनेश उरांव को मंत्री बनाकर सरकार में एडजस्ट किया जायेगा और विमला प्रधान या किसी अन्य वरिष्ठ विधायक को स्पीकर की कुर्सी सौंपी जा सकती है.

लेकिन सूत्र बताते हैं कि दिनेश उरांव ने शायद रघुवर सरकार में मंत्री बनने में अपनी रूचि नहीं दर्शायी है. इसे लेकर स्थितियां और उलझती दिख रही हैं. हालांकि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है, स्पीकर पार्टी अनुशासन से बंधे हैं, और सबकुछ स्मूथ रहेगा. काश! ऐसा ही हो...

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