झारखण्ड स्थापना दिवस: उम्मीद है, ख्वाहिशों को मिलेगी जमीन

झारखण्ड को बने 17 वर्ष हो गए। सत्रह साल काफी लंबा समय है, किसी व्यक्ति या समाज के लिए। डॉ राम मनोहर लोहिया ने कभी कहा था कि जिंदा कौमें 5 साल इंतजार नहीं करतीं। पर झारखंड की जनता ने 17 वर्ष का सफर तय कर लिया है। खुशी है कि धरती आबा बिरसा मुंडा के जन्म जयंती पर स्थापना दिवस मना रहे हैं। पर मन में कहीं मलाल भी है कि कुछ ख्वाहिशें अब तक अधूरी हैं। देश का 60 फीसदी आबादी युवा है, इसमें झारखंड के युवा भी हैं उनकी भी हसरतें हैं आसमान छूने की, देश के विकास में योगदान देने की। लेकिन राजनीति अस्थिरता और इच्छा शक्ति के अभाव में राज्य का विकास हाशिये पर चला गया।

इस लंबे कालखंड में राज्य की जनता ने कई उतार-चढ़ाव देखे। कई सपनों को बनते- बिखरते देखा। बहरहाल, पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार की पहल से राज्य के विकास के लिए कई योजनाएं और कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। सरकार ने आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए योजना बनाओ अभियान से लेकर पंचायतों तक को कई अधिकार दिए हैं। हर स्तर पर ये कोशिश की जा रही है कि राज्य के दूर- दराज के गांवों से लेकर कस्बे और शहरों का विकास हो।

झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 108 करोड़ की इमरजेंसी मेडिकल एबुंलेंस सेवा की शुरुआत की है। ये सेवा बिलकुल मुफ्त है। इसके साथ ही 636 करोड़ की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत की है। इस योजना में राज्य के 57 लाख गरीब परिवारों का दो लाख का स्वास्थ्य बीमा बिलकुल मुफ्त होगा। राज्य में बेरोजगारी और पलायन एक बड़ी समस्या रही है। राज्य के युवा दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं। ऐसी खबरें भी आती हैं कि उन्हें शारीरिक और आर्थिक शोषण झेलना पड़ता है। राज्य सरकार ने उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 1500 करोड़ की जोहार योजना लॉन्च की है। इसके साथ ही 40 हजार शिक्षकों को टैब, 24 कॉलेज प्राचार्य, 363 प्लस टू स्कूल शिक्षक, 254 डॉक्टर को नियुक्ति पत्र मिला है। राज्य में प्रधानमंत्री आवा, योजना के तहत 90 हजार घरों में गृह प्रवेश हो रहा है। ये विकास की उस लंबी फेहरिस्त है की कुछ छोटी झलकियां हैं जो स्थापना दिवस के मौके पर हुई हैं।

सरकार ने समावेशी विकास की दिशा में कई बड़े पहल किए हैं। सखी मंडलों के माध्यम से महिलाओं को गांव-गांव में सशक्त किया जा रहा है। कौशल विकास के जरिये युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ा जा रहा है। मोमेंटम झारखंड की पहल से ग्लोबल इंवेस्टर समिट का सफल आयोजन किया गया, 2 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है। हजारों युवाओं को रोजगार मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

मुख्यमंत्री जनसंवाद कार्यक्रम के जरिये आम लोगों की शिकायतों का ससमय निपटारा करना, उन्हें न्याय दिलाना, एक ऐसी मुहिम है जिससे सरकार के प्रति आम जनता की विश्वास कायम हुआ है। सरकार सीधे तौर पर जनता से जुड़ गई है।

हालांकि 17 सालों की कमी को तीन वर्षों में दूर करना इतना आसान नहीं है। मंजिल अभी भी दूर है। कई चुनौतियां हैं। राज्य की एक बड़ी आबादी आज भी विकास से कोसो दूर है। सरकार की योजनाएं अब तक उनके करीब नहीं पहुंच पायी हैं। बुनियादी सुविधाओं का घोर आभाव है। इसलिए सरकार को दिन-रात काम करना होगा। न्यू इंडिया का सपना न्यू झारखंड के बिना अधूरा है।

15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती है। आजादी की लड़ाई में 25 साल की उम्र में अपनी जान न्योछावर करने वाले भगवान बिरसा मुंडा झारखंडवासियों के प्रेरणास्त्रोत हैं। अंग्रेजी दासता के खिलाफ उलगुलान कर उन्होंने झारखंडवासियों को अपनी माटी से प्रेम करने सीख दी। अपने हक के लिए लिए आवाज बुलंद करना भगवान बिरसा मुंडा ने ही सिखाया है। आज की तारीख में इस बदले परिवेश में राज्य के हर नागरिक का कर्त्तव्य है कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान की दिशा में कदम बढ़ाये, यही मातृभूमि की सच्ची सेवा है।

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