झारखण्ड के कृषि मंत्री संकट में !

झाविमो से भाजपा का दामन थाम कर मंत्री बने रणधीर सिंह पर आखिर पार्टी क्या रुख अपनायेगी! इनके बयानों पर संगठन की ओर से इन्हें शो कॉज किया गया है. हालांकि प्रदेश अध्यक्ष ने इससे इनकार किया है, लेकिन कुछ तो पक ही रहा है. इस सवाल पर पहले से नाराज़ झाविमो से भाजपा में आये कई विधायक और भी हताश हो सकते हैं. सार्वजनिक तौर पर कहा जा रहा है कि मंत्री संकट में है लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता ऐसी बातों को महज़ अफवाह मानते हैं.

मंत्री पर आरोप है कि उन्होंने संगठन के खिलाफ सारठ में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि वे बीजेपी को तेल नहीं लगाएंगे बल्कि बीजेपी उनको तेल लगाएगी. उन्होंने संगठन और सरकार पर उनकी बातें नहीं सुने जाने का भी आरोप लगाया. पार्टी ने मामले का संज्ञान लेते हुए उनपर कार्रवाई करने का मन बना लिया है. इसीलिए उन्हें शो काउज भी किया गया है. जानकारों की मानें तो पार्टी कार्यकर्ताओं को सख्त संदेश भी देना चाहती है ताकि संगठन और सरकार पर कोई अंगुली न उठाए. पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि इससे सरकार और संगठन की बेवजह फजीहत हो रही है, और विपक्ष को बैठे-बिठाये सरकार को घेरने का मुद्दा मिल रहा है.

जानकारों की मानें तो पार्टी की ये सख्ती इसलिए भी है कि चुनाव आते-आते कुछ और लोग कहीं सरकार के खिलाफ झंडा न बुलंद कर दें. इसे ध्यान में रखकर हाल में पार्टी ने सीमा शर्मा, पलामू भाजपा नेता रवींद्र तिवारी, सोशल मीडिया के पूर्व संयोजक शिशिर ठाकुर को निलंबित कर दिया है. इन सब के बीच जो सबसे बड़ी बात सरकार और संगठन के खिलाफ उभर कर सामने आ रही है वह है पार्टी के अंदर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ता असंतोष. हालांकि पार्टी के सीनियर नेता इसकी जरूर कोशिश कर रहे हैं कि इसे किसी तरह से दबाया जाय. लेकिन समय-समय पर सरकार में बने मंत्रियों और संगठन की बागडोर संभाले नेताओं के बीच मतभेद की खबरें सार्वजनिक होती रही हैं.

उधर, सरकार और संगठन में बढ़ती खाई को पाटने के लिए नए संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह ने लगातार कोशिश की है पर कहीं न कहीं उन्हें भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का सहयोग नहीं मिल रहा है. इस बीच पार्टी के अंदर से भी अब ये आवाज आने लगी है कि अगर इसी तरह असंतोष को मिसमैनेज किया गया तो आने वाले दिनों में पार्टी में गुटबाजी को शह मिलेगा और इसका असर सियासी जमीन पर भी दिखाई दे सकता है. इसलिए नेताओं और कार्यकर्ताओं के गुस्से को समझने–बूझने की जरुरत है न की उन्हें दरकिनार करने की.

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