जगदेव बाबू की मौत पर JDU ने उठाया सवाल

सामजिक न्याय की लड़ाई के अग्रदूत शहीद जगदेव प्रसाद की मौत क्या एक साज़िश थी! कम से कम जदयू का तो ऐसा ही मानना है. शहीद जगदेव प्रसाद की जयंती के मौके पर बोलते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आरसीपी सिंह ने तो उनकी मौत को ही संदिग्ध बताते हुए सवाल खड़ा कर दिया. जदयू नेता ने कहा कि जब पुलिस की गोली से जगदेव बाबू की मौत हुई, तब केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. लेकिन मामले की पूरी जाँच नहीं कराई गयी.

आरसीपी सिंह ने कहा कि जब जगदेव बाबू को गोली लगी तब वो एमएलए और मंत्री रह चुके थे, सभी उन्हें जानते थे, ऐसे में जिस पुलिसवाले की गोली उन्हें लगी, क्या वो उन्हें नहीं पहचानता था! जदयू नेता ने सवाल उठाया कि पुलिस की गोली सीधा उन्हें ही कैसे लग गयी! उन्होंने नाम नहीं लेते हुए कहा कि इस मामले के जिम्मेवार अधिकारी मनमोहन सिंह की सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रहे!

जगदेव बाबू की मौत पर सवाल खड़ा कर जदयू नेता ने राजनीतिक सरगर्मी तो बढ़ा दी है लेकिन कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर जदयू उनकी मौत को संदिग्ध मानता है तो राज्य सरकार इसकी जांच क्यों नहीं करा लेती! अगर राज्य सरकार यह जांच नहीं कराती तो यह माना जायेगा कि केवल शब्दों की खानापूरी हो रही है.

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