तमाशा चल रहा है बिहार में

बिहार में राजनीति के नाम पर गजब-गजब किस्म के तमाशे चल रहे हैं. यह तमाशे परिवार, रिश्ते सब को सियासी बना रहे हैं. इस बीच विकास और गंभीर बहस के मुद्दे नेपथ्य में चले गए हैं. हम बात करते हैं सुशील मोदी के बेटे की शादी का. पहले तेज प्रताप यादव ने घर में घुसकर मारने की बात की फिर लालू ने मोर्चा संभाला और कहा आराम से शादी करिए. सुशील मोदी जी ने समारोह स्थल में परिवर्तन किया. यह भी सियासत का मुद्दा बन गया. मोदी के बेटे की शादी में लालू जाएंगे कि नहीं यह अलग से मुद्दा बन गया. आखिर हो क्या रहा है! 10 करोड़ से अधिक आबादी वाले बिहार में किसान, नौजवान, व्यापारी से जुड़े सैकड़ों मुद्दे हैं. जिनपर बहस की जरूरत है. ऐसे मसलों को छोड़कर किन की शादी में कौन जाएगा और कौन नहीं जाएगा. इससे आम आदमी को क्या मतलब है, पर बिहार की सियासत करने वाले बड़े नेता इन्हीं मसलों में उलझे हुए दिखते हैं.

अब बालू पर आइए. यह सभी जानते हैं कि बालू बेहद महंगा हो गया. इतना महंगा कि विकास के कामों पर असर पड़ने लगा. घर बनाने वाले लोग परेशान होने लगे कीमतें दुगुनी से ज्यादा हो गई. आज हाईकोर्ट ने कड़ा रुख दिखाया. अब सरकार को तय करना है, इंस्पेक्टर राज खत्म करके बालू को सर्वसुलभ बनाना है या लोगों को मुसीबत में डाले रखना है.

किसानों का सवाल अपनी जगह है. कोसी इलाके में बाढ़ के बाद किसानों के खेत में बालू जमा है. बिना अफसर के किसान अपने खेत से बालू नहीं हटा सकते, ऐसे में खेती ठप है तो आखिर यह मुद्दे राजनीति के केंद्र में क्यों नहीं आते! क्यों व्यक्तिवादी राजनीति हो रही है! आम लोग इन्हीं वजह से राजनीतिज्ञों से चिढ़ने लगे हैं.

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