प्रतिस्पर्धा सही पर गुस्से में फैसले लेना सही नहीं- मोहन भागवत

मोहन भागवत ने कहा कि हम पिछले कई सालों से दुश्मनों से लड़ते हुए आ रहे हैं, जिसके चक्कर में जन-धन की हानि होती है। उन्होंने कहा कि आज भी हम अपने आपको समझने के लिए विदेशी ग्रंथों को पढ़ते हैं, खुद के ग्रंथों को नहीं पढ़ते हैं। भागवत ने कहा कि प्रतिस्पर्धा सही है, लेकिन गुस्से में गलत फैसले उठाकर भारत को महाशक्ति नहीं बना सकते। ये बातें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में बिज़नेस क्षेत्र में राष्ट्रीयता और एथिक्स मुद्दे पर संबोधन में कही।

उन्होंने कहा कि पिछले 500-700 साल में आक्रामक इस्लाम से भी लड़ते हुए हमारे देश का वैभव कम नहीं हुआ। भागवत बोले कि ब्रिटिशों से लड़ते हुए भी हमारे देश की जीडीपी टॉप 5 में रही है। आज भी भारत पीछे नहीं है, भारत दुनिया का सर्वप्रथम देश है। लेकिन सर्वप्रथम की परिभाषा बदल गई है। जिसे देखते हुए हम कहते हैं कि हमारा देश पीछे है। कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि हम अभी धुन में खोए हुए हैं, हमें दिशा पकड़नी है। हमारी सही दिशा क्या है। हम विदेशियों की आखों से दुनिया को देखने लगे हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक जो चलता आया है उसी दिशा में बढ़ेंगे ऐसा नहीं है।

भागवत बोले कि जो व्यापार चल रहा है उससे विदेशियों के संस्कार आएंगे। और गलत बीमारी आएगी। इससे हमें डरना नहीं चाहिए, विदेशों के कारोबारी लिहाज से आदान-प्रदान करना होगा। हमें बिना भय के सभी को अपनाना होगा, निर्भय बनकर जाना होगा। गौरतलब है कि इससे पहले भी बीते सप्ताह गुवाहाटी में मोहन भागवत ने पाकिस्तान पर निशाना साधा था। इस बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पड़ोसी मुल्क पर निशाना साधते हुए कहा था कि भारत तो पाकिस्तान के साथ अपनी सारी शत्रुता भूल गया, लेकिन पाकिस्तान ने ऐसा नहीं किया।

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