नेतरहाट के जश्न में दब रहे कुछ जरुरी सवाल

रघुवर सरकार का नेतरहाट में आयोजित दो दिवसीय जलसा खत्म हो गया। खूबसूरत वादियों में खिली धूप में बैठकर सभी माननीयों ने उस खूशनुमा पल का लुत्फ उठाया। सियासी उठापटक की तकलीफों से दूर जहां मुखिया जी ने खूब मांदर बजाया, तो विधायकों, मंत्रियों ने उनकी थाप पर नृत्यकर बेरंग हो रही अपनी सियासत पर रंग डालने की कोशिश की।

जैसा होता आया है विपक्ष इस आयोजन पर बिफर उठा, कहा बीजेपी सरकार वहां जश्न मना रही है यहां नौजवानों की नौकरियां जा रही हैं। हमारी बहन-बेटियों को रोजी-रोटी का झांसा देकर महानगरों में बेचा जा रहा है। बाहरियों को नौकरी मिल रही है और अपने निवासियों को महानगरों में 5-5 हजार की नौकरी देकर सरकार उपलब्धियां गिना रही है। एक तरफ सरकार राज्य में निवेश लाने का ढोंग कर रही वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार एचईसी को बेचने की तैयारी कर रही है। हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। लेकिन राज्य सरकार को इसका इल्म तक नहीं। सरकार की कई नीतियों पर विपक्ष पहले से ही हमलावर है, अब उसे एक और मुद्दा मिल गया।

हालांकि सरकार के नेतरहाट विहार के दौरान जिस तरह विधायकों का एक बड़ा तबका यहाँ नहीं पहुंचा, उसने सरकार की परेशानी उजागर तो कर ही दी है। जो बात अब तक ढंके छुपे रूप में थी, वो सार्वजनिक हो गयी। सरकार के खेवनहार कह रहे हैं कि सब ठीक है। पर यह ठीक तो दिखना भी चाहिए ना।

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