तेज़स्वी को पॉलिटिकली खत्म करने की साज़िश!

-लालू...तेज़स्वी...अब कौन

अभी पूरा लालू कुनबा सीबीआई और ईडी के चक्कर काट रहा है। पहले लालू को हर तीसरे दिन चारा घोटाले के फिर से खोले गए केस के सिलसिले में गवाही के लिए रांची सीबीआई कोर्ट के चक्कर काटना पड़ता था। अब दिल्ली भी उन्हें हर सप्ताह जाना है। लालू के बाद पार्टी में बचे तेज़स्वी और तेजप्रताप। राजनीतिक रूप से मजबूत समझे जाने वाले तेज़स्वी भी कई बेनामी कम्पनी और होटल चाणक्य के मामले में सीबीआई द्वारा तलब किये जा चुके हैं। उनसे लम्बी पूछताछ हो चुकी है। आशंका है कि यह यादव राजकुमार भी लालू की ही तरह अदालती चक्कर में उलझकर कहीं सियासी पारी को हिट विकेट न करा लें। राजद के विरोधी तो इस स्थिति से बेहद आनंदित हो रहे हैं।

बिहार में सबसे बड़े यादव वोटबैंक के धुरंधर खिलाडी लालू यादव तो ऐसी स्थितियों के अभ्यस्त हो चुके हैं पर पहले लालू, फिर मीसा और राबड़ी के बाद लालू कुनबे के घोषित उत्तराधिकारी तेज़स्वी यादव को जिस तरह एक के बाद एक मामले में केन्द्रीय एजेंसी घेरने की कोशिश कर रही है, वह लालू के समर्थकों को चुभ रही है।

लालू परिवार की संपत्ति अटेच की जा रही है। उनका सियासी मूवमेंट रोक सा दिया गया है। फिर भी उनके हौसले पस्त पड़ते नहीं दिख रहे। तेज़स्वी ने भी कहा है कि इन साजिशों से वो रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने तो सीधे-सीधे भाजपा पर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगा दिया। लेकिन बिहार की राजनीति के बहुत से जानकार इससे इत्तेफाक नहीं रखते।

जेडीयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने तो कह भी दिया कि धीरे-धीरे लालू की राजनीति का सारा स्याह पक्ष सामने आ रहा है। लेकिन राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी कहते हैं कि लालू और उनके पुरे परिवार को परेशान करने की कोशिश हो रही है, पर हम पहले भी ऐसे साजिशों से बाहर निकले और अब भी निकलेंगे।

You May Also Like

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *