नेता प्रतिपक्ष को बच्चा कहना मतदाताओं का अपमान!

बिहार के तकरीबन 12 करोड़ लोगों का मततंत्र| जहां हर दिन सियासी सांप-सीढ़ी खेली जा रही है| ऐसे तो हर प्रदेश का अपना सियासी व्याकरण है, गुणा - भाग है| पर बिहार में राजनीति की भाषा अब मतदाताओं के अपमान पर उतर आई है| एक दूसरे को नीचा दिखाने की हसरत इनके समर्थकों पर भारी पड़ रही है| लगातार बिहार विधानसभा के नेता विरोधी दल को बच्चा कहकर अपमानित किया जा रहा है| यहां यह भी याद रखने की जरुरत है कि जिन्हें बच्चा कहा जा रहा है वो बिहार विधानसभा के सबसे बड़े दल के नेता हैं|

सबसे पहले नज़र डालते हैं कुछ बड़े नेताओं के बयां पर| अपने लोक संवाद कार्यक्रम के बाद खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बयान कि तेज़स्वी तो अभी बच्चा हैं|

जदयू के प्रवक्ता संजय सिंह ने भी तेज़स्वी को बच्चा और लालू प्रसाद को अमर्यादित बयान का पीएचडी बता दिया| उनके दूसरे प्रवक्ता भी ऐसा बयान कई बार दिया|

उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील मोदी ने छठ महापर्व पर विवादित बयान दिया, जब मामला बढ़ा तो उन्होंने कह दिया कि तेज़स्वी अभी बच्चा है, उन्हें कुछ भी कहने का अधिकार है|

दो दिन पहले बिहार सरकार के मंत्री मंगल पाण्डेय ने तेज़स्वी यादव और तेजप्रताप यादव को अनपढ़ बताया|

आखिर ऐसा क्यों ! क्या जो व्यक्ति बिहार का उप मुख्यमंत्री रह चुका हो, नेता प्रतिपक्ष हो उसपर ऐसी टिप्पणी कोई और दूसरा नहीं खुद सीएम और डिप्टी सीएम करे तो लगता है जैसे सियासत का स्तर बेहद गिर गया है| युवा राजद के महासचिव फरजान अहमद कहते हैं कि दरअसल सभी दल तेज़स्वी की लोकप्रियता से घबरा गए हैं| इसलिए वो बिहार की राजनीति के भविष्य तेजस्वी को पचा नहीं पा रहे हैं| सीमांचल से युवा राजद के बड़े चेहरे एमके रिज़वी उर्फ़ नन्हा मुश्ताक़ कहते हैं कि जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार विकास के सवाल पर फेल है, किसानों के सवालों पर फेल है, ऐसे में तेजस्वी यादव पर अपनी खीझ निकालने की यह कोशिश बेमतलब और बेमानी है|

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