मिशन 2019 से पहले राज्यों में बढ़ा BJP का प्रभाव

बिहार की सियासत में हुए इस बड़े बदलाव का असर केंद्र की राजनीति में भी देखने को मिलेगा. 2019 के आम चुनाव में मोदी को टक्कर देने के लिए विपक्ष जिस राष्ट्रीय महागठबंधन की बात कर रहा था उसका सबसे विश्वसनीय चेहरा दूसरे खेमे में चला गया. अब विपक्ष को मोदी से टक्कर लेने के लिए अपनी रणनीति फिर से तैयार करनी होगी.

नीतीश कुमार के एनडीए के खेमे में आने को 2019 चुनाव से पहले मोदी-शाह की जोड़ी की बड़ी सफलता मानी जा रही है. इससे एक तरफ जहां विपक्ष का सबसे विश्वसनीय चेहरा अपने पाले में आ गया है वहीं मोदी को चुनौती देने के लिए राष्ट्रीय महागठबंधन बनाने का आइडिया भी फेल होता हुआ दिख रहा है.

2014 के चुनाव में बीजेपी ने ऐलान किया था कि कांग्रेस मुक्त भारत उसका लक्ष्य है. इस दिशा में बीजेपी काफी हद तक सफल भी रही है. भाजपा के विस्तार के साथ ही पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस का ग्राफ नीचे गया है. हिमाचल में इसी साल चुनाव होने है. सीएम वीरभद्र सिंह आरोपों में घिरे हुए हैं और बीजेपी यहां भी जीत का दावा कर रही है. अब देश की सबसे पुरानी पार्टी के पास सिर्फ कर्नाटक जैसा बड़ा राज्य बचा हुआ है जहां अगले साल चुनाव होना है और बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा कांग्रेस को बेदखल करने के लिए पूरी मेहनत कर रही है. अपने मिशन पर आगे बढ़ते हुए भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों की सत्ता हासिल की. अब नीतीश कुमार के साथ आने से भाजपा के मिशन को और भी बल मिला है.

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