फिर उठने लगे डॉ अजय की कार्यशैली पर सवाल !

मिशन 2019 की तैयारी को लेकर सूबे की सभी सियासी पार्टियां जुट गई हैं। बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने को लेकर खूब बैठक की जा रही है। पार्टी के कार्यकर्ताओं को इसको लेकर स्पष्ट संदेश दिए जा रहे हैं। इन सब के बीच महागठबंधन के प्रमुख पार्टी कांग्रेस में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। कहा जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर-तरीकों के कारण अभी तक प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर तक की कमेटी भी नहीं बन पाई है जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बन गई है। वहीं प्रदेश के कई बड़े नेताओं ने भी इसको लेकर डॉ अजय पर सवाल उठाए हैं।

जानकारों की मानें तो हाल में हुए राज्यसभा चुनाव और उसके बाद निकाय चुनाव में जिस प्रकार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है उससे ऐसा लगा कि पार्टी एक बार फिर पटरी पर लौट रही है लेकिन इसके बावजूद संगठन के विस्तार से लेकर बूथ स्तर तक कमेटी के गठन को लेकर जिस प्रकार कांग्रेस में धीमी चाल है इससे पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ता जा रहा है।

बताया जा रहा है कि इसके पीछे नेताओं के बीच आपसी संवाद और समन्वय का आभाव है। डॉ. अजय कुमार को प्रदेश अध्यक्ष का कमान संभाले 6 महीने से अधिक हो गए हैं। लेकिन अब तक पीसीसी के गठन की बात तो दूर जिला और प्रखंड की कमेटियां भी पूरी तरह से नहीं बन पाई हैं। जब यह बात प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह के पास पहुंची तो उन्होंने इसकी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाते हुए 31 अगस्त कर दी। लेकिन अधिकतर जिलाध्यक्ष कमिटियों को गठित नहीं कर पाए हैं। इसलिए एक बार फिर डॉ. अजय कुमार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर पार्टी पूरी तरह से विफल रही है।
पार्टी कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दे रही है कि अगर ऐसा ही होता रहा तो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी को एक बार फिर झटका लग सकता है।

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