मधुबनी में कांग्रेस के बागी शकील अहमद सबसे आगे, वोटरों पर निष्कासन का नहीं पड़ा कोई प्रभाव

मधुबनी सीट को लेकर लगभग सभी राजनीतिक दलों के ऑफिस में जोड़ घटाव की राजनीति चालू है। जोड़ घटाव कि इस राजनीति में सबसे आगे निर्दलीय उम्मीदवार शकील अहमद को रखा जा रहा है। यानि NDA खेमें के लोग भी इसबात को मानने से इंकार नहीं कर रहे की उनकी लड़ाई शकील अहमद से नहीं है। वे भी कह रहे हैं लड़ाई शकील अहमद और NDA उम्मीदवार अशोक कुमार यादव के बीच ही है।

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव में मधुबनी सीट इसबार काफी सुर्खियों में रही। शुरू से ही इस सीट को लेकर राजद और कांग्रेस खेमें में स्थानीय स्तर पर उहापोह की स्थिति बनी रही। पहले राजद के कद्दावर नेता अली अशरफ़ फातमी ने इस सीट को लेकर दावा किया, जब उन्हें टिकट नहीं मिली, उसके बाद कांग्रेस के कद्दावर नेता शकील अहमद ने दावा ठोक दिया। हालांकि यह सीट न राजद के पाले में रही और न कांग्रेस के, महागठबंधन में समझौते के तहत सीधे VIP के पास गई। और मुखिया मुकेश सहनी ने इंजीनियर बद्री पूर्वे को मैदान में उतार दिया।

गौरतलब है कि अली अशरफ़ फातमी अपरोक्ष तौर पर कांग्रेस नेता शकील अहमद को अपना समर्थन दे दिया। शकील अहमद पहले से भी मजबूत हो गए। स्थानीय स्तर पर महागठबंधन उम्मीदवार से ज्यादा नेताओं ने शकील अहमद को तरजीह दिया। बेनीपट्टी से कांग्रेस विधायक भावना झा भी शकील अहमद के लिए खुलकर प्रचार प्रसार करने में लगी हुई थी। मतदान से ठीक एकदिन पहले शकील अहमद और भावना झा को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया। लेकिन वोटरों पर इस निष्कासन का कोई खास असर नहीं पड़ा।

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