तीनों मामलों में सरकार ने खुद ही ले ली क्लीन चिट!

आखिरकार सरकार ने वही किया जो वह कर सकती थी, या यूं कहें कि करने में महारथ हासिल है...मामले की लीपापोती। संतोषी की मौत की असली वजह सरकार के अधिकारी जानते हैं, उसकी मां नहीं। वह तो अनपढ़ है। गरीब है। अभिशप्त है। वैसे भी गरीबों की मौत मुफलिसी में ही होती है। भले ही महानगरों में बैठे हुक्मरानों की ठाट-बाट और तिजोरी इन्हीं गरीबों के विकास की झूठी दलीलों से भरती हो। वह गरीबी जिसे इस शासन तंत्र ने उसे तोहफे में दिया है।

राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने 25 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जो बातें मीडिया के समक्ष कहीं उस पर जरा गौर कीजिए। उन्होंने कहा कि सिमडेगा में बच्ची संतोषी की मौत के मामले में विभागीय स्तर पर यह कमी थी कि उसका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था। देवघर के रूपलाल मरांडी की मौत के मामले में कहा कि दिसंबर में उसके परिजनों ने राशन उठाया है। मशीन से राशन का उठाव किया गया है लेकिन राशन कार्ड में नहीं चढ़ा है। वहीं झरिया में मृतक बैद्यनाथ की परिवार की ओर से कुछ दिन पहले राशन कार्ड के लिए आवेदन दिया गया था। गढ़वा मामले में भी अक्टूबर तक का राशन पीड़ित परिवार की ओर से उठाया गया है।

कुल मिलाकर वही हुआ जो सरकारी जांच में अबतक होता आया है। इस तथा कथित गहन जांच की आंच उन तक नहीं पहुंची जो इन बेबस गरीबों की मौत के असली गुनाहगार हैं। सरकारी अधिकारियों ने मंत्री जी को जो रिपोर्ट सौंपे उसमें इस बात का खुलासा हुआ कि किसी की भी मौत भूख से नहीं हुई है। पर सवाल उठता है कि मीडिया में ऐसा क्यों दिखाया गया की इनकी मौत भूख से हुई है। इस पर सरकार का जवाब न कभी मिला है और न मिलेगा। पारदर्शी सरकार में सिर्फ निर्णय होते हैं। समारोहों में दिखावे के लिए। फैसले भी होते हैं। लेकिन एक तरफा। इन पीड़ित परिवारों की पीड़ा को सरकारी खानापूर्ति कर तहखाने में सील कर दिया गया।

एक बार फिर सरकार के प्रतिभावान अधिकारी यह साबित करने में सफल रहे कि ये मौतें भूख से नहीं हुई हैं बस होनी थी, सो हो गई। वैसे भी मौत को कौन टाल सकता है। टाली जा सकती है तो सिर्फ जवाबदेही। जिसकी आगोश में न जाने संतोषी की तरह कितनी बच्चियां अब तक समा चुकी हैं। पर विडंबना है कि इस गरीब बेबस जनता के दर्द को समझने की दुहाई देने वाले राजनेता भी इन्हें समझ नहीं पाते।
ये अफसोस और फिक्र की बात है कि क्या ऐसे ही होगा न्यू झारखंड का निर्माण।

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