सीएस पर टालमटोल से सरकार को हो सकता है नुकसान

चारा घोटाले में नया नाम सामने आया है, राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा फंसती नजर आ रही हैं। इस हाईप्रोफाइल केस में बड़ी-बड़ी राजनीतिक हस्तियां जेल की सलाखों के पीछे हैं। राजद सुप्रीमो जेल में हैं, इससे पहले पूर्व मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती को भी सजा हो चुकी है।

इन सब के बीच देखा जाय तो राजबाला वर्मा कई लोगों के निशाने पर रही हैं। राजनीति से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक हर किसी के जुबान पर यह मामला चढ़ा हुआ है। लेकिन मंत्री सरयू राय की तल्खी के सियासी मायने अलग हैं। ये बात जगजाहिर है कि कई मौकों पर वे सरकार के फैसलों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे कई मामले हैं जिन पर वे सरकार को कटघरे में खड़ा करने से भी नहीं हिचकते। कभी सरकार द्वारा शराब बेचने को लेकर तो कभी 105 खादानों के नवीकरण के फैसले पर वे सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने मुख्य सचिव राजबाला वर्मा की कार्यशैली पर उस समय सवाल खड़ा कर दिया था जब सिमडेगा में बच्ची संतोषी की मौत हो गई थी। कहा था कि इसके लिए मुख्यतौर पर मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ही जिम्मेवार हैं क्योंकि उन्होंने ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ऐसे राशन कार्ड रद्द करने के निर्देश दिए थे जो आधार कार्ड से जुड़े नहीं हैं। इतना ही नहीं मंत्री सरयू राय ने मुख्यमंत्री जनसंवाद में होने वाले तत्काल कार्रवाई पर भी सवाल कर दिया था। वहीं नक्सली सरेंडर पॉलिसी को लेकर भी वे काफी मुखर हुए थे। उनका कहना था कि नक्सलियों का महिमामंडन कर क्यों उनका सरेंडर कराया जा रहा है।

वहीं अंदरखाने इस बात की भी चर्चा है कि मंत्री सरयू राय इस बार मुख्य सचिव के बहाने सरकार को निशाने पर ले सकते हैं। देखा जाय तो मामला बेहद गंभीर है और सरकार को भी तुरंत इस पर कोई फैसला लेना होगा, क्योंकि ठीक इसी तरह के मामले में कईयों पर कार्रवाई हो चुकी है। और सरकार भी जितनी जल्दी हो इससे पीछा छुड़ाने की ही कोशिश करेगी।

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