बेटियां आगे बढ़ेंगी तो देश आगे बढ़ेगा : रीना यादव

ये बिहार की राजनीति की मर्दानियां हैं। हम इन्हें मर्दानी इसलिए कह रहे हैं कि अपने मुकाम के लिए इन सबने बहुत संघर्ष किया और आज भी कर रही हैं। इन्हें थाल में सजाकर कोई पद नहीं मिला। संघर्ष के हर चूल्हे -चौके को लांघकर इन्होंने सियासत की देहरी पर अपने पांव जमाए हैं। हर विषय पर इनके अपने मौलिक विचार हैं। ये गलत को गलत और सही को सही कहने का माद्दा रखती हैं। हम आनेवाले अंकों में ऐसी और भी सियासी मर्दानियों से आपको रू-ब-रू करायेंगे। इस अंक में पढ़िये चार नेत्रियों की कहानी, हमारे संवाददाता रतन कुमार की जुबानी...
बिहारी राजनीति की ये मर्दानियां -3
जदयू से नालंदा की एमएलसी रीना यादव का जन्म पटना के बोरिंग रोड में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ । उनके पिता की पटना में प्लास्टिक के सामान की दुकान थी और उनकी माता एक बुटीक चलाती थी। उन्होंने सरकारी स्कूल से मैट्रिक तक की पढ़ाई की। शादी हो जाने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा और समाजशास्त्र से एमए किया। लालू प्रसाद के शासनकाल में सौंदर्यीकरण का काम चल रहा था। उसी समय कुछ लोगों की मिलीभगत से उनके पिताजी की दुकान को तुड़वा दिया गया। उसके बाद उन लोगों को काफी आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। 1995 में मैट्रिक की पढ़़ाई करने के बाद आर्थिक परेशानियों के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। यादव समाज में उस समय लड़कियों को ज्यादा पढ़़ाया नहीं जाता था क्योंकि लोगों का ऐसा मानना था कि लड़कियां ज्यादा पढ़ाई करंेगी तो उनकी शादी में परेशानियां होंगी।
पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने शादी में मेहंदी लगाने का काम शुरू किया। 19 साल की उम्र में 2000 में नालंदा के राजू यादव से उनकी शादी तय हो गई राजू यादव उस समय राजनीति में स्ट्रगल ही कर रहे थे पहली बार उनके पति राजू यादव नालंदा से एमएलसी का चुनाव लड़े और 35 वोट से हार गए। 2005 में हुए रीलेक्शन में हिलसा से एलजेपी से चुनाव लड़े और 12 वोटों से हार गए। 2009 में उनके पति राजू यादव ने नालंदा से नॉमिनेशन तो किया लेकिन एक साजिश के तहत उन्हें आर्म्स एक्ट में फंसाकर जेल भेज दिया गया। तब रीना यादव ने उनकी जगह पर चुनाव प्रचार किया और लोगों से वोट मांगे। 2009 में एलजेपी पार्टी से राजू यादव ने पहली बार चुनाव में जीत दर्ज की। इसके बाद 2010 में हिलसा से रीना यादव चुनाव में खड़ा हुइंर् लेकिन 10 हजार वोट से चुनाव हार गईं। 2015 में रीना यादव जदयू से नालंदा में एमएलसी का चुनाव लड़ी और 600 वोटों से जीत दर्ज की। महिलाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ तेजी से अत्याचार बढ़ रहे हैं एक तरफ सरकार महिलाओं को जागरुक करने का काम कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ उन्हीं के करीबियों द्वारा उनका शोषण किया जा रहा है सरकार को इस पर सख्त कदम उठाना चाहिए। महिलाओं के लिए बिहार सरकार कई योजनाएं चला रही है लड़कियों के लिए पोशाक राशि, नैपकिन की राशि, साइकिल योजना छात्रवृत्ति आदि कई ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं महिलाओं को पंचायत में 50% आरक्षण दिया गया है। महिलाओं के लिए मेयर की सीट आरक्षित रखी गई है। महिलाओं को 35% सरकारी योजनाओं में आरक्षण दिया गया। पुलिस भर्ती में महिलाओं को 35% सीटें दी गईं। बिहार सरकार महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम कर रही है, गांव में स्वयं सहायता केंद्र जीविका चलाया जा रहा है, इन योजनाओं का लाभ उठाकर महिला सबल हो रही हैं, महिलाएं जागरूक हो रही हैं, शराबबंदी से महिलाएं काफी खुश हंै। यह महिलाओं की मांग पर ही नीतीश कुमार ने लागू किया है। बाल विवाह दहेज प्रथा बंदी को लेकर बिहार सरकार लोगों को जागरूक कर रही है। क्रेडिट कार्ड योजना सबके लिए है, चाहे लड़का हो या लड़की 4 लाख तक लोन मिल सकता है। महिलाओं को ध्यान में रखकर बिहार सरकार काम कर रही है लेकिन सरकार के साथ-साथ जनता को भी जागरुक होना चाहिए ,महिलाएं शिक्षित होंगी तो उन्हें सही गलत का पता रहेगा। बेटियां आगे बढ़ेंगी तो देश आगे बढ़ेगा, समाज आगे बढ़ेगा। शादी में जाति प्रथा खत्म होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी निजी स्वार्थ को प्राथमिकता नहीं दी उन्होंने हमेशा से बिहार की जनता की भलाई के लिए ही काम किया है।
उन्हें कभी कुर्सी का लालच नहीं रहा अगर कुर्सी की लालच होती तो वह जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री नहीं बनाते। मुख्यमंत्री कभी भी गलत चीजों के हिमायती नहीं रहे हैं गलत करने वाला कोई भी हो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उसका विरोध करते हैं और उन्हें सजा दिलाते हैं नीतीश कुमार केवल काम करने में विश्वास करते हैं उनका मानना है कि हम सभी को बिहार के विकास के लिए काम करना चाहिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार के विकास की चिंता करते हैं ना कि वोट कि वह कभी यह नहीं सोचते कि अगली बार हमारी सरकार बनेगी या नहीं वह बस बिहार के विकास के लिए काम करते रहते हैं अगर नीतीश कुमार केवल अपनी कुर्सी के बारे में सोचते तो बिहार में कभी शराबबंदी नहीं करते समाज में अच्छा काम करने का उनका संकल्प ही है कि उन्होंने बिना अपनी कुर्सी के बारे में सोचते हुए शराबबंदी की हलाकि शराबबंदी से राजस्व में कमी आई लेकिन जनता के हित में यह फैसला लिया गया जितने भी सरकार आती है ज्यादातर कुर्सी के चक्कर में अच्छा काम नहीं कर पाती है नीतीश जो कहते हैं वही करते हैं उन्होंने कहा था कि महिलाओं को 35% आरक्षण दिया जाएगा तो उन्होंने दिया शराबबंदी करने की बात कही थी जो किया। 2005 से अब तक बिहार में विकास काफी हुआ है बिहार में गांव गांव में सड़क और बिजली में काफी काम हुआ है आज गांव गांव में बिजली 20 से 22 घंटे रहती है इसकी प्रशंसा पूरे देश में हो रही है।

 

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