पूरी निष्ठा से लडूंगा समाज की लड़ाईः सुदेश महतो

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि कुड़मी समाज की लड़ाई लड़ने के लिए किसी की इजाजत लेने की जरुरत नहीं है, हो सकता है कि कुछ लोगों को किसी के प्रति कोई प्रतिबद्धता हो पर मैं पूरी निष्ठा के साथ इस लड़ाई को दिल्ली के रामलीला मैदान तक पहुंचाकर रहूंगा। ये बातें उन्होंने कुड़मी विकास मोर्चा की महारैली में कही।

उन्होंने कहा कि कुड़मी समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है हमारे समाज के लोगों ने देश की आजादी की लड़ाई से लेकर झारखंड राज्य बनाने के संघर्ष को लेकर अपनी शहादत दी है। आज हमारे अधिकारों की बात है तो हम पीछे कैसे हट सकते हैं। उन्होंने कहा कि कुड़मी को एसटी का दर्जा मिले इससे किसी की हकमारी नहीं होगी, यह किसी के खिलाफ लड़ाई नहीं है। इससे किसी समाज का कोई नुकसान नहीं होने वाला है।

श्री महतो ने कहा कि इसके लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलटकर देखना होगा की आखिर हमारे समाज के साथ ऐसा क्यों हुआ कि हमें हमारा हक नहीं मिला। हमें आदिवासी का दर्जा क्यों नहीं मिला, इसका मूल्यांकन करने के लिए अपने अतीत को समझना जरूरी है। ये समाज के हित में भी है।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के शासन काल 1931 से ही इसका विरोध जारी है, 1948 में जयपाल सिंह मुंडा ने भी संविधान सभा में कुरमी को आदिवासी का दर्जा देने की वकालत की थी। इसके बाद रामदयाल मुंडा से लेकर निर्मल मिंज तक कई जानकारों ने इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाई थी। लेकिन किसी कारण वश कुड़मी समाज को उनका हक नहीं मिल सका।

लेकिन अब इस लड़ाई का नेतृत्व पूरा समाज करेगा, राज्य के हर युवा, महिलाएं इसका नेतृत्व करेंगी। हमारा समाज बिहार, बंगाल और ओडिशा तक फैला हुआ है। जरुरत इस बात की है कि पूरे समाज को अपने अधिकार के लिए जागरुक होना होगा और इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना होगा।

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