सरकार की हड़बड़ी से फिर हो सकता है नुकसान!

-कमेटी की कुछ सिफारिशों से बिगड़ सकती है बात

स्थानीय नीति और नियोजन नीति को लेकर गठित उच्चस्तरीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास है इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय अब सीएम को ही लेना है। कमेटी ने नियुक्तियों में खतियान को आरक्षण का आधार बनाने की सिफारिश की है। लेकिन कहा जा रहा है कि यह संविधान और सरकार की नीति के खिलाफ है। क्योंकि भूमिहीनों को आरक्षण की ज्यादा जरुरत है और इस सिफारिश से वे ही आरक्षण से वंचित हो जाएंगे। हालांकि सरकार इस रिपोर्ट की अनुशंसाओं पर महाधिवक्ता सहित अन्य विशेषज्ञों से भी राय ले रही है।

देखा जाय तो कमेटी ने इसके साथ ही सरकार की ओर से लागू स्थानीय नीति के अनुरूप 1985 से पहले झारखंड में बसने वालों को स्थानीय के लिए आरक्षित नौकरियों में सामान्य वर्ग के रूप में देखे जाने पर विपक्षी दलों के नेताओं ने एक बार फिर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार हड़बड़ी ऐसे फैसले न ले जिससे उसे बार-बार अपना फैसला बदलना पड़े। इस मुद्दे पर कांग्रेस विधायक सुखदेव भगत का कहना है कि सरकार ने पहले हड़बड़ी में नियोजन नीति घोषित कर दी। लोगों के विरोध के बाद जल्दबाजी में कमेटी घोषित कर दी। सरकार को कोई भी निर्णय लेने से पहले इस बात का ध्यान रखना होगा कि यहां के लोगों को न्याय मिले।

झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन ने कहा है जिस उद्देश्य से झारखंड अलग राज्य का निर्माण हुआ, वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। वर्तमान सरकार बाहरी लोगों को स्थानीय नीति बनाकर लाभ पहुंचा रही है। रघुवर सरकार ने 1932 के खतियान को दरकिनार करते हुए 1985 से राज्य में रहने वाले लोगों को झारखंडी बना दिया। झामुमो की सरकार बनने पर 1932 के खतियान को कड़ाई से लागू किया जायेगा। मूल खतियानी ही झारखंडी हो सकते हैं।

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