अपने कुनबे को कैसे संभालेंगे डॉ साहब !

मिशन 2019 की तैयारी में सभी दल जुट गए हैं, कोशिश की जा रही है कि अपने दल को दुरुस्त कर चुनावी मैदान में पूरे दमखम से उतरा जाए। प्रदेश कांग्रेस में भी इस बात फोकस किया जा रहा है कि प्रदेश स्तर से लेकर जिला और प्रखंड स्तर तक पार्टी को मजबूत किया जाए। कार्यकर्ता और नेता इसको लेकर काफी सक्रिय हैं और हाल के दिनों में सरकार विरोधी धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि संगठन में बदलाव आया है।
इन सब के बीच कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस की कमान डॉ अजय कुमार के हाथों में सौंप दी और पार्टी को सजाने-संवारने की जिम्मेदारी सौंपी। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों तक तो सब कुछ ठीक चला लेकिन जैसे ही नए प्रदेश अध्यक्ष ने पुराने नेताओं से पूछताछ करना शुरू किया, धीरे-धीरे विवाद बढ़ता गया। रही सही कोर-कसर जिलाध्यक्षों ने पूरी कर दी। कहा गया कि डॉ अजय पार्टी के पुराने नेताओं से किसी भी प्रकार का राय मशवरा नहीं करते सिर्फ कुछ आधारहीन नेताओं से घिरे हुए हैं। डॉ अजय पर कांग्रेस नेता सुनील सिंह ने तो जान से मारने की धमकी की बात कही। उन्होंने कहा कि डॉ अजय शूट करने की बात करते हैं, कांग्रेस में इस प्रकार का कल्चर कभी नहीं रहा है कि अपने ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को शूट करने की धमकी दी जाए। पार्टी के कुछ नेता डॉ अजय पर बाहरी होने का भी आरोप लगाते हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें कांग्रेस की राजनीति के बारे में कुछ भी पता नहीं है।
कांग्रेस के अंदर चल रही खींचतान के कारण ही कहा जा रहा है कि जब दिल्ली में प्रदेश के बड़े नेताओं को प्रभारी आरपीएन सिंह ने मीटिंग के लिए बुलाया तो कई नेताओं ने इसमें शामिल होना भी मुनासिब नहीं समझा और साफ कन्नी काट गए। कहा जा रहा है कि प्रदीप बलमुचू, मन्नान मलिक, सुबोधकांत सहाय, ददई, दुबे और राजेंद्र सिंह जैसे कांग्रेस के कद्दावर नेताओं का बुलाए जाने पर भी नहीं जाना पार्टी के लिए खतरे के संकेत हैं। ऐसे समय में जब अंदरूनी विवाद को किनारे रखकर मिशन 2019 की तैयारी में लगने का समय है पार्टी के सीनियर नेता प्रदेश अध्यक्ष के साथ दो-दो हाथ करने के मूड में हैं।

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