बिहार की हिंदू राजनीति में ट्विस्ट लाने की कोशिश

अगले चुनाव से पहले बिहार की हिंदू राजनीति में कई पेंच आने वाले हैं। शिवसेना, हिंदू महासभा, जनसंघ और भारतीय जनतांत्रिक दल जैसे कट्टर हिंदूवादी दलों के बीच पक रही सियासी खिचड़ी कुछ बड़ा गुल खिला सकती है और अगले चुनाव में बिहार की भगवा सियासत का रंग रोगन खराब कर सकती है। हाल ही में पटना में इन कट्टर भगवा दलों की रणनीतिक बैठक हुई। जिसमें तय किया गया कि वोटरों के सामने ऐसा विकल्प रखा जाये जिसके जरिये यह साबित करने की कोशिश हो कि राजनीति सेवा के लिए होनी चाहिए ना कि मेवा के लिए। तो रणनीतिकारों ने पटकथा लिख ली है, अगर इसे सही से जमीन पर उतार दिया गया तो बिहार की केसरिया चित्रकारी पर बड़े दाग धब्बे लग सकते हैं।

हम सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें कि इन संगठनों का पोलिटिकल बैलेंसशीट अब तक क्या रहा है! किस भरोसे ये संगठन बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। अगर इनकी सियासी पटकथा इतनी ही मजबूत है तो इनको बिहार में अबतक कैसी ओपनिंग मिली। अगर नहीं मिली तो क्यों! इनके कमाल के राजनीतिक दर्शन सेवा के बदले मेवा क्यों को क्यों नहीं समझ पाए लोग!

पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना और भारतीय जन क्रांति दल ने तक़रीबन 100 उम्मीदवार मैदान में खड़ा किये थे। निश्चित रूप से इस समीकरण ने हर सीट पर कमल के लिए ही मुश्किलें खड़ी की थी। इस सम्बन्ध में जनसंघ के भारत भूषण पाण्डेय कहते हैं कि हिंदू वोटबैंक को गोलबंद करने के चक्कर में कई बड़ी गलती हो रही है। तात्कालिक लक्ष्य के चक्कर में लोग मेवा के फेर में हैं और इससे बड़ा भारी वैचारिक नुकसान हो रहा है।
रणनीतिकार राकेश रंजन और चन्द्रप्रकाश कौशिक भी एक वैकल्पिक और सेवावादी भगवा सियासत की बात करते हैं। इन्हें लगता है कि एक-एक विधायक पर लाखों खर्च होता है। इससे ये अपने सेवा पथ से भटक जाते हैं। इन्हें जनता से कोई संवाद नहीं रखना होता। बस दमड़ीजोड़ो सियासत।

इनलोगों की रणनीति यह है इस बार तकरीबन 200 सीटों पर अच्छी छवि के योग्य और सेवापथ पर चलने का सार्वजनिक संकल्प लेने वाले लोग मुख्यधारा की राजनीति में आयें और चुनाव लड़ें।
अगर ऐसा होता है तो आनेवाले समय में भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आप कल्पना करिए कि हर सीट पर अच्छी छवि के इन उम्मीदवारों ने 5000 वोट भी काट दिए तो भाजपा की खटिया खड़ी हो जाएगी। शायद इसी विषय की गंभीरता को समझते हुए संघ के कुछ वरीय अधिकारियों ने मामले को शांत करने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं।

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