हिमाचल कांग्रेस में दरार, CM वीरभद्र ने किया चुनाव न लड़ने का ऐलान

देशभर के कई राज्यों में हार का मुंह देख चुकी कांग्रेस के लिए हिमाचल से भी अच्छी खबर नहीं है। लंबे समय से हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का इकलौता चेहरा बने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने फ्री हैंड न मिलने से खफा होकर चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया है। छठी बार मुख्यमंत्री बने वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश में अपनी मजबूत जड़ों का एहसास पहले भी कई बार कांग्रेस हाईकमान को करवाया है। शायद आज भी पार्टी के अंदर हालात अपने अनुकूल न होते देख वीरभद्र सिंह फिर से हाईकमान के साथ भिड़ने को तैयार दिख रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस संगठन के साथ तालमेल सही न बैठने के कारण व्यथित होकर उन्होंने बीते दिनों चुनाव लड़ने और लड़वाने से इन्कार कर दिया है। इस बारे में उन्होंने एक विस्तृत पत्र ई-मेल द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया है। सीएम वीरभद्र सिंह ने बीते दिनों कांग्रेस विधायक दल की बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की बात कह कर सभी को चौंका दिया है। सूत्रों के अनुसार सीएम ने बैठक में ये कह दिया कि जो हालात चल रहे हैं। वे इसमें चुनाव नहीं लड़ सकते। उनके इस ऐलान के बाद प्रदेश कांग्रेस के लगभग सभी नेताओं की परेशानी बढ़ गई है। जबकि कांग्रेस विधायक दल ने एक प्रस्ताव हाईकमान को भेजकर साफ कर दिया है कि वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में उन्हें पूरी आस्था है और कुछ माह बाद होने वाले चुनाव भी उनके ही नेतृत्व में होने चाहिएं।

हालांकि, राजनीतिक जानकारों की राय में वीरभद्र सिंह का चुनाव में न उतरने का फैसला कहीं न कहीं दबाव की राजनीति से जुड़ा नजर आ रहा है क्योंकि अपने जीवन के अखिरी चुनाव में वह अपने बेटे विक्रमादित्य सिंह को भी एडजस्ट करना चाहते हैं और पूरे दम के साथ चुनाव में उतर कर सरकार रिपीट करने की कोशिश करना चाहते हैं। ऐसे में वह हाईकमान से फ्री-हैंड चाहते हैं।

कांग्रेस हाईकमान ने अनेक बार वीरभद्र सिंह की बजाय राज्य के किसी न किसी नेता को नेतृत्व सौंपने की कोशिश की है। लेकिन हर बार हाईकमान की ऐसी कोशिशों को वीरभद्र सिंह अपने साथ खड़ी कांग्रेसी नेताओं की फौज के दम पर नाकाम करते आए हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में भी कांग्रेस हाईकमान ने कौल सिंह ठाकुर को चेहरा बनाने की कोशिश की थी। लेकिन चुनावों से ठीक पहले हाईकमान को कौल सिंह को प्रदेश कांग्रेस पद से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा और 4-5 विधायकों को छोड़ बाकी सभी के समर्थन से वीरभद्र सिंह छठी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। मगर इसी बीच कांग्रेस हाईकमान ने संगठन की बागडोर सुखविंदर सिंह सुक्खू के हाथों में सौंप दी थी।

अभी भी सुक्खू ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं और संगठन को अपने तौर-तरीकों से चला रहे हैं, जो वीरभद्र सिंह को नापसंद है। ये दोनों नेता अनेक बार सार्वजनिक मंचों से एक-दूसरे पर टिप्पणियां कर चुके हैं। सत्ता और संगठन के बीच चल रही इस लड़ाई का असर कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनावों पर दिखता नजर आ रहा है। कांग्रेस हाईकमान ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे को हिमाचल कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया है लेकिन वह हिमाचल प्रदेश के अपने दौरों के दौरान वीरभद्र और सुक्खू के बीच के मतभेदों को दूर नहीं कर पाए हैं। जबकि शिंदे के दौरों के दौरान तो परिवहन मंत्री जी.एस. बाली, पूर्व विधायक निखिल राजौर सहित पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री रहे पं. सुखराम ने अपने संबोधनों में वीरभद्र सिंह पर पूरा निशाना साधा।

इससे पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सुशील कुमार शिंदे और सुखविंदर सिंह सुक्खू को भी बुलाया गया था। जिसमें शिंदे के सामने कांग्रेस के कई विधायकों ने सुखविंदर सिंह सुक्खू और परिवहन मंत्री जी.एस. बाली को खूब खरी-खोटी सुना डाली। सुशील कुमार शिंदे ने हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के अंदर चल रही इस गुटबाजी को दूर करने के संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को कुछ सुझाव दिए हैं। इन सुझावों पर कुछ काम शुरू होता, इससे पहले ही वीरभद्र सिंह द्वारा अचानक चुनाव से दूर हो जाने की घोषणा से कांग्रेस हाईकमान की चिंताएं और बढ़ गई है। क्योंकि अक्तूबर-नवम्बर माह में हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है। चुनावों से ठीक पहले वीरभद्र सिंह की अचानक नाराजगी से उत्पन्न होने वाले राजनीतिक नुक्सान के लिए कांग्रेस हाईकमान किसी भी सूरत में तैयार नहीं है।

यही कारण है कि उन्हें हाईकमान ने दिल्ली बुला लिया है। जाहिर है कि वीरभद्र सिंह के गिले-शिकवों को दूर करने का प्रयास कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी खुद करेंगी। दूसरी ओर वीरभद्र सिंह के विरोधी और राजनीति के जानकार चुनाव में न उतरने की उनकी घोषणा को सिर्फ दबाव की राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। क्योंकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ कोई मंच सांझा न करने की बात कह चुके वीरभद्र सिंह चुनावों से पहले पार्टी के अंदर बदलाव चाहते हैं। सुक्खू के साथ चुनाव में न उतरने की बात वह बहुत पहले कर चुके हैं। जाहिर है कि सुक्खू की जगह वह हिमाचल कांग्रेस के लिए नया अध्यक्ष चाहते हैं। दूसरी तरफ सुक्खू को हिमाचल कांग्रेस के इक्का-दुक्का नेताओं का ही समर्थन हासिल है और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी उन्हें पसंद करते हैं। यही वजह है कि सुक्खू पिछले साढ़े 4 वर्षों से इस पद पर बने हुए हैं।

हालांकि, इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष बदलने के लिए 2 या 3 बार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सोनिया गांधी को पत्र भी लिख चुके हैं। लेकिन इस बार उन्होंने जो पत्र लिखा है। उसमें साफ कर दिया है कि वर्तमान में संगठन का साथ उन्हें बिल्कुल ही नहीं मिल रहा है और ऐसे में वह न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही लड़वाएंगे। वीरभद्र सिंह के इस पत्र से इन दिनों कांग्रेस हाईकमान पूरी तरह से हिली हुई है। क्योंकि वीरभद्र सिंह की मजबूत राजनीतिक पकड़ का एहसास हाईकमान को भी है और वह विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सामने आई इस परिस्थिति से निपटने का तोड़ ढूंढने लग पड़ी है।

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