निर्दोष मर रहे पर दोषी अधिकारियों को बचा रही सरकारः हेमंत

बजट सत्र के चौथे दिन भी विपक्ष ने सदन के भीतर और बाहर खूब हंगामा किया। पूरे विपक्ष ने सीएस राजबाला वर्मा, डीजीपी डीके पांडेय, एडीजी अनुराग गुप्ता को बर्खास्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि भ्रष्ट पदाधिकारियों को हटाने की बात हो या फिर जन प्रतिनिधियों की बात, मुख्यमंत्री सिर्फ आश्वासन ही देते हैं। जिसके आप (स्पीकर) भी भुक्तभोगी हैं। तीन दिन से लगातार एक ही बात सदन में उठ रही है लेकिन सरकार को इससे कोई मतलब नहीं है। भानू प्रताप का क्या होगा यह तो हम नहीं जानते लेकिन सीएम ने कई ऐसे आश्वासन दिये हैं जो अब तक अधूरे हैं। हम सभी बातों को सदन में लायेंगे। उन्होंने कहा कि सीएम ने कहा था कि ललपनिया में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। 90 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने की बात थी। लेकिन यह नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि हम सदन से जानना चाहते हैं कि सदन किसके लिए है। क्या यहां लोगों की समस्याओं को नहीं उठाया जाये। जिस पदाधिकारी के एक आदेश से सूबे में व्यक्ति की मौत होती है तो ऐसे पदाधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। किसी आम व्यक्ति की हत्या होने पर उससे संबंधित हर व्यक्ति से पूछताछ होती है, लेकिन एक बड़े पदाधिकारी के आदेश के बाद होने वाली मौत से सरकार खामोश है। साथ ही डीजीपी के आदेश से जांच के सबूत को मिटाने की बात कही जाती है। यह क्या बात है। विपक्ष का सवाल अभी भी बना हुआ है। ठोस जवाब नहीं मिलेगा तो सरकार खुद सदन चला ले।

स्पीकर ने कहा कि इस पर बात होगी। लेकिन सभी सदस्य कम से कम आसन की बात सुनें। इसी बीच अमित महतो ने जेपीएससी पर लाये गये कार्यस्थगन की बात दोहरायी। स्पीकर ने कहा कि जब आपके बड़े नेता विषय को रख चुके हैं फिर आप क्यों दोहरा रहे है। हेमंत सोरेन ने कहा कि यह घोर अन्याय है सरकार के आदेश से लोग भूख से मर रहे हैं। ऐसा नहीं चलेगा। 11 लाख राशन कार्ड और 11 लाख जॉब कार्ड डिलिट हुआ है।

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