सरकार बताए, सदन के बाद का दूसरा दरवाज़ा: हेमंत

बजट सत्र के तीसरे दिन भी सीएस, डीजीपी और एडीजी का मुद्दा सदन के अन्दर और बाहर छाया रहा। विपक्षी दलों ने सदन के बाहर हाथों में तख्ती लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आला अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की। सदन की कार्रवाई शुरू होते ही स्पीकर दिनेश उरांव ने सभी सदस्यों से प्रश्न काल चलाने की बात कही। बावजूद इसके सदस्यों का हंगामा जारी रहा। झामुमो विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि विपक्ष ने जिस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा है वह जब तक नहीं मिलेगा चुप नहीं बैठेंगे। सरकार अविलंब सीएस राजबाला वर्मा, डीजीपी डी के पांडेय और एडीजी अनुराग गुप्ता को बर्खास्त करे।


इसी बीच नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि विपक्ष की तरफ से कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर बार-बार आला अधिकारियों को हटाने की बात कह रहा है। लेकिन सरकार खामोश है। सदन में यह मांग करने पर कहा जाता है कि उक्त सवालों के जवाब देने के लिए यह उचित प्लेटफार्म नहीं है, दूसरे दरवाजे से आयें। लेकिन सरकार का यह भी दायित्व है कि आपातकाल, गरीबों की समस्याओं का चर्चा इसी सदन में करे। क्या जो सदन के सदस्य नहीं होते उनके बारे में सदन में चर्चा करना गलत है, स्पीकर बतायें, यदि नियम परिनियम के तहत विपक्ष को सदन में सवाल नहीं उठाना है तो दूसरी कौन सी व्यवस्था है। गंभीर विषय पर सरकार को जवाब देना चाहिए। हो-हंगामे के बीच ही भाजपा विधायक अनंत ओझा ने कहा कि 45 विधेयक और 65 सवाल पर कोई चर्चा नहीं हुई है। यह काफी शर्म की बात है। जनता के सवालों को विपक्ष के द्वारा रोका जा रहा है।

अल्पसूचित प्रश्नकाल सहित अन्य की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन विपक्ष चाहता है कि दबंगई कर के अपनी बात मनवा ले। सरकार हमेशा से तैयार है कि विपक्ष सवाल उठाये सदन में उसपर चर्चा होगी। लेकिन इस तरह हंगामे से कैसे काम चलेगा। स्पीकर ने कहा कि जो स्थिति बन रही है उससे तय है कि प्रश्नकाल चलने नहीं दिया जायेगा। हर बात सदन पर आने से ही कोई कोई फलाफल निकलता है। यही स्थिति बनी रही तो बेहतर होगा कि सदन को बंद कर दें। इसी बीच झाविमो विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि हम भी चाहते है कि प्रश्नकाल पर चर्चा हो। कोई सकारात्मक रिजल्ट निकले। सदन में सीएम, संसदीय कार्यमंत्री बैठे हैं। सिर्फ दो बातें कहनी थी। निर्वाचन आयोग ने सरकार को निर्दशित करते हुए पत्र के माध्यम से कहा था कि एडीजी अनुराग गुप्ता पर एफआईआर किया जाये। बावजूद इसके सरकार चुप रही। इतने गंभीर विषयों पर जब सरकार चुप रहेगी तो हमारा चुप रहना बेमानी होगा। साथ ही सरकार यह भी बताये कि एम वी राव ने भी सरकार को जो बातें निर्देशित किया था उस पर क्या हुआ। इतना सुनते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी हंगामा शुरू कर दिया। स्पीकर ने कहा कि व्यक्तिगत बातें सदन में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अविलंब सर्वदलीय नेताओं की बैठक अपने कक्ष में बुलाई और सदन की कार्रवाई पहली बार 12.15 तक के लिए स्थगित कर दिया।

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