उपसभापति चुनावः नंबर गेम में हरिप्रसाद पर भारी पड़ रहे हरिवंश

राज्यसभा उपसभापति चुनाव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने-सामने है, इसको लेकर दोनों ही ओर से कोशिश की जा रही है कि किसी भी तरह से जरूरी आंकड़ा जुटा लिया जाए। देखा जाय तो राज्यसभा उपसभापति का चुनावी मुकाबला एनडीए बनाम कांग्रेस का हो गया है।
बता दें कि कांग्रेस ने आज बीके हरिप्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि एनडीए की तरफ से जदयू सांसद हरिवंश सिंह उपसभापति के उम्मीदवार हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो संख्या को देखते हुए फिलहाल बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए आगे है। हालांकि इससे पहले कहा जा रहा था कि विपक्ष एनसीपी की वंदना चव्हाण को उम्मीदवार बना सकता है लेकिन बाद में बीके हरिप्रसाद को उम्मीदवार को तौर पर पेश किया गया।
विपक्ष की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी ने कुछ सोच-समझकर ही उनका नाम इस पद के लिए आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि हम सभी विपक्षी दलों से बात करेंगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
वहीं, एनडीए उम्मीदवार हरिवंश ने राज्यसभा उपसभापति पद के लिए बुधवार को पर्चा दाखिल किया है। उनके पर्चा दाखिल करने के वक्त पूरा एनडीए एकजुट दिखा। शिवसेना के नेता भी हरिवंश सिंह के पर्चा भरने के वक्त मौजूद थे।
जानकारों की मानें तो फिलहाल राज्यसभा में एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है। राज्यसभा में बीजेपी का आंकड़ा 116 तक पहुंच गया है। बीजेडी के सांसदों के समर्थन के बाद यह 123 होगा। बीजेपी का प्रयास है कि 125- 128 वोट हासिल किया जाए। बीजेडी के समर्थन के बगैर बीजेपी विपक्ष से पीछे रह जाएगी। इस लिहाज से देखा जाय तो बीजेडी का फैसला अहम होगा। हालांकि बताया जा रहा है कि बीजेडी प्रमुख और ओडिशा के सीएम नवीन पटनायक ने बातचीत में एनसीपी नेता शरद पवार से कहा है कि क्योंकि विपक्ष ने समर्थन को लेकर उनकी पार्टी से कोई बात नहीं कही है, इसलिए उन्होंने नीतीश कुमार के उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है। यदि एआईएडीएमके (13), बीजेडी (9), टीआरएस (6) और वाईएसआर कांग्रेस (2) का समर्थन एनडीए को मिल जाता है तो उसके पास 126 मत हो जाएंगे। उच्च सदन में बीजेपी के 73 और कांग्रेस के 50 सदस्य हैं। बीजेपी के सहयोगी जदयू, शिवसेना और अकाली दल के 6 और 3-3 सदस्य हैं।
वहीं विपक्ष के पास 118 वोट हैं। सभी पार्टियों ने कांग्रेस से एनडीए प्रत्याशी के विरोध में अपना उम्मीदवार खड़ा करने को कहा था, क्योंकि कोई भी क्षेत्रीय पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा करना चाहती थी।

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