सुबोधकांत से ही बचेगी झारखंड कांग्रेस !

सुखदेव भगत की कुर्सी जाएगी या उन्हें एक और मौका मिलेगा, यही सवाल अंतर्विरोध से जूझते हर कांग्रेसी की जुबान पर है. झारखंड कांग्रेस में संगठन चुनाव का काम लगभग ख़त्म ही होनेवाला है, ऐसे में सभी कांग्रेसजन यह जानना चाहते हैं कि आगे क्या ! 2019 में चुनाव भी होने हैं, और यह चुनाव देश और प्रदेश में कांग्रेस के लिए करो या मरो वाली होगी. ऐसे में यह बेहद महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी की कप्तानी कौन करेगा!

कई पार्टी पदाधिकारी चाहते हैं कि इस यह जिम्मेवारी कद्दावर नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय को सौंपी जाय. वह सोये हुए प्रदेश कांग्रेस में नया जीवन फूंक सकते हैं. उत्साही नेताओं की टोली बनाकर कार्यकर्ताओं को सौंपी जाये तो कांग्रेस फिर से खड़ी हो सकती है. ये काम सुबोधकांत बखूबी कर सकते हैं.

सुबोधकांत को संगठन और प्रशासन का बेहतर अनुभव रहा है. वो राजधानी रांची से कई बार सांसद रहे हैं. जनाधार वाले नेता हैं और भाजपा से उसी की शैली में लड़ भी सकते हैं. अल्पसंख्यकों के बीच इनकी अच्छी इमेज है, जिसका फायदा ये पूरे प्रदेश में पार्टी को दिला सकते हैं. इनके अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस की चुनावी सम्भावना कई गुना बढ़ सकती है. संथालपरगना से पलामू तक सुबोधकांत प्रमुख कार्यकर्ताओं को जुबानी बुला सकते हैं, वरिष्ठ कांग्रेसियों को साथ लेकर ये चुनावी वैतरणी आराम से पार कर सकते हैं

अभी कांग्रेस में कई गुट है. ऐसे में एक पार्टी नेता ने ठीक ही कहा कि कांग्रेसी ही कांग्रेस के दुश्मन हैं. झारखंड में पार्टी भाजपा से नहीं अपनों से ही लड़ रही है. ऐसे में पूर्व अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू, धीरज साह, राजेंद्र सिंह, ददई दुबे, आलमगीर आलम, फुरकान अंसारी, कृष्णानंद झा जैसे दिग्गजों को सहाय एक मंच पर ला सकते हैं. फिर पार्टी चमत्कारिक तरीके से खड़ी हो जायेगी.

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