बेरोज़गारी पॉलिटिक्स पर दांव लगाएगी’ सरकार’!

- नौजवानों के हाथ रहे खाली, उन्हें दिखाया जायेगा सपनों का बाज़ार

भाजपा ने हर साल 1 करोड़ बेरोजगारों को काम देने का वायदा किया था, पर पिछले तीन सालों में लाखों लोग बेरोजगार हुए हैं। यह बाज़ार की सुस्ती के कारण हुआ है, जिसके लिए भी सरकारी नीतियाँ ही जिम्मेवार रही है। अब जब चुनाव का माहौल बनने लगा है, तो एकबार फिर पक्ष और विपक्ष दोनों बेरोज़गारी को सियासी चादर बनाकर ओढने की फ़िराक में है ताकि इनके पाप धुल जाएं और देश के करोड़ों नौजवान हसीन ख्वाबों की दुनिया में डूब जाएं।

मसले को हवा दी राहुल गाँधी ने। उन्होंने अमेरिका में भारतीय समुदाय के लोगों के बीच कहा कि बेरोजगारी भारत की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है और मोदी सरकार इसका हल ढूंढने में नाकाम रही है। एक दिन पहले ही राहुल ने ये भी माना था कि यूपीए सरकार लोगों को नौकरियां नहीं दे पायी इसीलिए नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने का मौका मिला।

पीएम मोदी ने सत्ता में आने से पहले कहा था, ‘जब अटल जी की सरकार थी तो 6 साल में 6 करोड़ लोगों को रोजगार दिया था और जब यूपीए की सरकार आयी तो 2004 से 2009 में सिर्फ 27 लाख लोगों को रोजगार दिया, आप मुझे बताइए मेरे नौजवान मित्रो क्या ये कांग्रेस के हाथ में देश के नौजवानों का भविष्य सुरक्षित है।’ गौरतलब है कि मोदी ने वादा किया था कि अगर बीजेपी में सत्ता में आई तो हर साल 1 करोड़ नई नौकरियां पैदा की जाएंगी। इस वादे के मुताबिक अब तक देश में 3 करोड़ नई नौकरियां होनी चाहिए, लेकिन हकीकत में इसका 5 फीसदी भी नहीं हो पाया है।

लेबर ब्यूरो के मुताबिक देश में नौकरी पैदा करने वाले 8 प्रमुख सेक्टरों में पिछले कुछ सालों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।2009 में यूपीए सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद से 2014 तक इन सेक्टरों में कुल 35 लाख नौकरियां दी गईं। इसमें यूपीए के आखिरी ढाई साल यानी 2012 से मई 2014 के बीच 8.86 लाख नौकरियां आईं।जबकि 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद के ढाई सालों में सिर्फ 6.41 लाख नई नौकरियां ही आयीं।

हालांकि इन आंकड़ों के जवाब में बीजेपी के पास अब भी सिवाए कांग्रेस को कोसने के और कोई तर्क नहीं है। हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि आप हमारा 3 साल का हिसाब मांग रहे हो, जनता आपसे तीन पीढ़ी का हिसाब मांग रही है।

बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा, ‘राहुल गांधी जी जब नौकरियों की बात करते हैं तो न तथ्यों को देखते हैं न यूपीए के कार्यकाल को।’ देश में बेरोजगारी की बढ़ती समस्या की सबसे बड़ी वजह नेताओं और राजनीतिक दलों का यही रवैया है।बीजेपी पिछली सरकार पर सवाल उठा रही है और अपनी पीठ ठोंक रही है कि उसने मुद्रा लोन और कौशल विकाल मंत्रालय के जरिए नौकरियों के नए रास्ते खोले हैं। वहीं सत्ता में रहते हुए बेरोजगारी कम करने में नाकाम रही कांग्रेस के उपाध्यक्ष अब ये दावा कर करे हैं कि उनके पास नई नौकरियां पैदा करने का फॉर्मूला है।

नेताओं की इस बयानबाजी के बीच बेरोजगारी का असली मुद्दा लगातार खोता जा रहा है।बेरोजगारी बढ़ना और नई नौकरियों का ना आना फिलहाल मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी है। हालांकि सरकार अब भी 2020 तक 5 करोड़ नई नौकरियों का दावा कर रही है लेकिन उसके पहले 2019 में चुनाव हैं और तब तक अगर वादे हकीकत में नहीं बदले तो मोदी सरकार को इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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