स्थानीय व नियोजन नीति में संशोधन करे सरकारः गौतम सिंह

आजसू छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सिंह ने कहा कि सरकार नियोजन नीति और स्थानीय नीति को लेकर टालमटोल का रवैया अपना रही है, सरकार की मंशा सही नहीं है। सत्ताधारी 24 से ज्यादा विधायकों ने स्थानीय नीति और नियोजन नीति को लेकर विरोध किया है तब गैर अधिसूचित जिलों में होने वाली बहालियों के लिए नियोजन नीति की समीक्षा के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। भूराजस्व मंत्री अमर कुमार बाउरी को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। इस कमेटी को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देना था लेकिन अब कहा जा रहा है कि इसके लिए विस्तृत अध्ययन की जरुरत है और दूसरे राज्यों में किए गए प्रावधानों का भी अध्ययन किया जाएगा, जिससे कोई कमी नहीं रह जाय। छात्र नेता गौतम सिंह ने कहा कि कुल मिलाकर मामले को फिर से एक महीने के लिए टाल दिया गया।

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में स्थानीय नीति और नियोजन नीति में संसोधन की मांग को लेकर आजसू धरना-प्रदर्शन कर रही है, 50-75 युवा आमरण अनशन पर बैठे हैं। जब तक राज्य के युवाओं के हित में हमारी मांगे सरकार नहीं मानती है तब तक ये अनशन जारी रहेगा। युवा नेता ने कहा कि हमारे आंदोलन को पद्मश्री मुकुंद नायक ने भी समर्थन दिया है श्री नायक ने कहा है कि युवाओं ने ही अलग झारखंड की लड़ाई लड़ी थी, अब वक्त आ गया है कि राज्य के नियोजन नीति और स्थानीय नीति पर भी युवा आगे आएं, क्योंकि युवा ही राज्य का भविष्य बदल सकता है।

श्री सिंह ने कहा कि स्थानीय नीति में कई खामियां हैं जिसका खामियाजा यहां के स्थानीय आदिवासी, मूलवासी भुगत रहे हैं। हमारी दो मुख्य मांगे यही हैं कि सरकार अविलंब स्थानीय नीति, नियोजन नीति में जरूरी संशोधन करे। उन्होंने बताया कि हमारी मांग है कि स्थानीय नीति में 6 बिंदुओं पर पुनर्विचार किया जाए और इस पर आवश्यक संशोधन किए जाएं। उन्होंने कहा कि नई स्थानीय नीति में 1985 से रह रहे लोगों को स्थानीय माना गया है जबकि ये सदियों से बेरोजगारी, अशिक्षा, पलायन का दंश झेल रहे आदिवासियों, मूलवासियों के साथ धोखा है। हमारी मांग है कि 1932 के सर्वे को अंतिम आधार माना जाय। वहीं जिस व्यक्ति ने झारखंड से सिर्फ मैट्रिक की परीक्षा पास की हो उसे भी स्थानीय माना जाएगा जबकि ये प्रावधान सरासर स्थानीय लोगों के साथ नाइंसाफी है, इसके साथ ही वैसे सभी पदाधिकारी या कर्मी जो झारखंड में कार्यरत हों उनके बच्चे भी स्थानीय माने जाएंगे जबकि ऐसा देखा गया है कि ऐसे बहुत सारे लोग हैं जो दो राज्यों के स्थानीयता का लाभ ले रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने 13 जिलों को अधिसूचित जबकि 11 जिलों को गैरअधिसूचित कर दिया है अब सवाल उठता है कि क्या उन जिलों में मूलवासी नहीं हैं क्या उन्हें राज्य की नौकरियों में आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। एक राज्य में दो प्रकार की स्थानीय नीति कैसे हो सकती है क्या इससे राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह पाएगा। क्या ये राज्य के मूलवासियों, आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं है।

श्री सिंह ने कहा कि राज्य सरकार को पिछले एक वर्ष से ज्यादा समय से आजसू छात्र संगठन की ओर से जन की बात कार्यक्रम के जरिये इस गंभीर विषय पर ध्यान आकृष्ट कराया जा रहा है पर सारी बातें अनसुनी कर दी जा रही हैं और नियुक्तियां की जा रही हैं। जन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आजसू छात्र संगठन ने राज्य के सारे कॉलेजों, विश्वविद्यायलयों से छात्रों द्वारा लिखे गए 10 लाख पोस्टकार्ड मुख्यमंत्री सचिवालय को भेजा गया ताकि मुख्यमंत्री युवाओं के दर्द समझ सकें पर इसपर अभी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके अलावा पार्टी की ओर से भी 15 लाख लोगों ने पोस्टकार्ड मुख्यमंत्री को स्थानीय नीति में संशोधन को लेकर भेजे पर किसी की भी बात नहीं सुनी जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब आजसू सड़क पर उतर गई है और किसी भी रूप में अब स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ये धरना युवाओं के हित में, स्थानीय मूलवासियों के अधिकारों को लेकर किया जा रहा है। इस मौके पर अब्दुल जब्बार, गदाधर महतो, रणधीर वर्मा, रविंद्र नाथ ठाकुर, डब्लू महतो, नीरज कुमार, उदय मेहता, दिलीप किस्कू और मंगल खड़िया सहित अन्य छात्र नेताओं सरकार को राज्य हित में नीतियों में संशोधन करने की बात कही।

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