छात्रों के आंदोलन को हल्के में ना ले सरकार: AJSU

मनोज कुमार सिंह
पिछले 3 दिनों से जारी छात्र आजसू के आंदोलन का दायरा व्यापक होने लगा है. स्थानीय और नियोजन नीति को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन और आमरण अनशन के समर्थन में कई कॉलेजों के छात्रों ने अपना समर्थन दिया. कल मारवाड़ी कॉलेज, राम लखन कॉलेज, डोरंडा कॉलेज के अनेकों छात्रों ने रांची विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया. छात्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सिंह ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा कभी भी स्थानीय एवं नियोजन नीति को लेकर गंभीर नहीं था. वर्तमान सरकार के नीतियों पर सवाल खड़ा करते हुए छात्र नेता ने कहा कि लगता है कि सरकार छात्रों के आंदोलन को लेकर गंभीर नहीं है, जिसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा. आमरण अनशन पर बैठे छात्रों के समर्थन में कल दिनभर हजारों छात्र गांधी प्रतिमा के समक्ष पहुंचकर इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया.

आम छात्रों का मानना है कि यदि स्थानीय और नियोजन नीति को नहीं बदला गया तो झारखंड के छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा. उनका यह भी मानना है कि यह आंदोलन पूरे झारखंड में तेजी से फैलेगा और छात्र तब तक चुप नहीं बैठेंगे जब तक इसका समाधान नहीं निकल जाता है. बहुत से छात्र इस बात को लेकर गंभीर हैं कि झारखंड की आरक्षण नीति और नियोजन नीति दोनों की विसंगतियां आने वाली पीढ़ी को ही बर्बाद कर देगी। उन लोगों का यह भी कहना था कि राज्य की सभी पार्टियां राजनीति कर रही हैं, लेकिन छात्रों के भविष्य के प्रति कोई गंभीर नहीं है, वहीं दूसरी ओर छात्र आजसू के नेता इस आंदोलन को पूरे राज्य में फैलाने की तैयारी कर रहे हैं. यह सही है कि 3 दिन के आमरण अनशन के बाद भी सरकार का कोई प्रतिनिधि छात्रों से मिलने नहीं पहुंचा है, यदि छात्र आंदोलन का दायरा बढ़ गया तो सरकार के लिए एक नई मुसीबत खड़ी हो सकती है. विगत दिनों दबी जुबान से सरकार की नुमाइंदगी करने वाले अनेक विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने भी स्थानीय और नियोजन नीति को लेकर अपनी मंशा स्पष्ट की है लेकिन आजसू छात्र संगठन इस मुद्दे को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में है. इतिहास गवाह है कि जब कभी भी छात्रों ने अपने आंदोलन को लेकर सड़क पर लड़ाई लड़ी है, उसका दायरा बहुत व्यापक रहा है. अब जबकि कई छात्रों की स्थिति बिगड़ने लगी है, इस हालात में जैसे-जैसे यह खबर राज्य के दूसरे हिस्सों में पहुंचेगी वैसे-वैसे छात्र और भी आंदोलित होंगे और जगह-जगह धरना प्रदर्शन शुरू हो जाएगा. आजसू के महासचिव डॉ देवशरण भगत ने छात्रों की बिगड़ती हुई हालत पर चिंता जताई है. उनका मानना है कि छात्रों की मांग पर सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए और नियोजन एवं स्थानीय नीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.

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