सरकार पिछड़ों के साथ कर रही अन्यायः पिछड़ा मोर्चा

झारखंड में 56 प्रतिशत आबादी के साथ केन्द्र व राज्य सरकार अन्याय कर रही है। सरकार की नीतियों के कारण इस समुदाय के नौजवान बेरोजगार हैं उनकी हकमारी हो रही है। ये बातें दुमका जिला पिछड़ा मोर्चा के नेता वरुण यादव ने कही। बता दें कि जामा प्रखंड स्थित सिलांदा शिव मंदिर प्रांगण में सोमवार को प्रमंडलीय पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति के बैनर तले पूर्व सरपंच श्रवण मंडल की अध्यक्षता में पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा का बैठक आयोजित किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण दुमका में पिछड़ों का आरक्षण शून्य कर युवाओं को बेरोजगार करने का काम किया है। जिससे यहां के पिछड़ा वर्ग समुदाय अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। अब देर से ही सही आंदोलन का बिगुल बज गया है आने वाले के दिनों में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

जरमुंडी पिछड़ी जाति के नेता सैलजा नंद राय ने कहा कि झारखंड में पिछड़ा वर्ग की आबादी 56 प्रतिशत है लेकिन सभी सरकारें वोट की राजनीति कर रही हैं जिलों में 27 प्रतिशत आरक्षण घटाकर कुछ जिलों में 14 प्रतिशत तो दुमका में शून्य कर दिया गया है जो संवैधानिक अधिकारों का हनन है। जिससे यहां के पढ़ें लिखे युवा बेरोजगार होते जा रहे हैं। अब संघर्ष मोर्चा गांव-गांव भ्रमण कर अपने अधिकारों के लिए आंदोलन चलाने का काम रहे हैं। भाजपा के नेता सह उपप्रमुख इंद्रकांत यादव एवं नकुल यादव ने कहा कि पार्टी एवं संगठन से ऊपर उठकर सभी पिछड़े समुदाय को एक मंच पर आकर संघर्ष करने की जरुरत है तभी सार्थक परिणाम निकलेगा।

वहीं जेएमएम के सुरेंद्र यादव ने कहा कि अविभाजीत झारखंड-बिहार में पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त था लेकिन अलग राज्य होने के बाद आरक्षण को 14 प्रतिशत कर पिछड़ों को अपमानित करने का काम किया गया है। जबकि बिहार में 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है अब पुनः 33 प्रतिशत की लड़ाई लड़ी जाएगी। राजेन्द्र यादव ने कहा कि अब यह लड़ाई जन आंदोलन का शक्ल लेने जा रही है। 18 फरवरी को जरमुंडी में पिछड़ा सम्मेलन में हजारों लोग जुटेंगे।

बैठक में ग्राम प्रधान मांझी संगठन के प्रखंड अध्यक्ष विभूति भूषण यादव, बासुकीनाथ के नेता उमेश पंडा, जयप्रकाश यादव,विनोद राउत, निमाकान्त मुसुप ने जनसभा को संबोधित किया। इस अवसर पर ग्रामप्रधान भागवत राणा,रामकुमार दर्वे, दिलीप यादव, शक्ति दर्वे, गौतम दर्वे, विजयकांत, पारिजात साह उदयकांत, बालेश्वर राणा, मसुदन राउत, आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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