आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का हक छीन रही सरकारः यूनियन

मुख्यमंत्री एक तरफ तो महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की बात करते हैं राज्य के सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं को स्मार्ट फोन देने का वादा करते हैं वहीं दूसरी तरफ बीते 11 दिनों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं। सरकार के रवैये से परेशान होकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को मानव श्रृंखला बना कर मुख्यमंत्री और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व में निकाली गई यह मानव श्रृंखला राजभवन से जयपाल सिंह स्टेडियम होते हुए कचहरी चौक तक पहुंची। इस दौरान महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ‘रघुवर सरकार होश में आओ, मानदेय बढ़ाने का समझौता लागू करो’, ‘बकाया मानदेय पोषाहार देना होगा’ जैसे नारे लगाए।
झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कस यूनियन के प्रदेश संयोजक रामचन्द्र पासवान ने बताया कि 9 बिन्दुओं को लेकर महिला बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे एवं यूनियन द्वारा पहले ही लिखित समझौता किया गया था, लेकिन अभी तक सरकार के किसी प्रतिनिधि ने हमारी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
यूनियन के नेता बालमुकुंद ने बताया कि एक ओर सरकार महिलाओं की सशक्तिकरण की बात करती हैं। दूसरी ओर उनके हक-अधिकारों का हनन करती है। विभाग के सचिव एवं आंगनबाड़ी यूनियन के बीच 9 सूत्री मांगों को लेकर गत 23 जनवरी को लिखित सहमति बनी थी। सचिव ने तीन माह के अंदर ही उनकी मांगों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन सहमति के करीब चार माह बीतने के बाद भी आज तक उनकी मांग अधूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार के वादा खिलाफी के विरोध में पिछले 7 मई से सेविका-सहायिकाओं का अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। हड़ताल का गुरुवार को 11 वां दिन है। यह हड़ताल मांग पूरी होने तक जारी रहेगी। मानव श्रृंखला में काफी संख्या में सेविका-सहायिकाएं शामिल हुई।
झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कस यूनियन की मांग है कि सेविका-सहायिका का स्थायीकरण हो, इन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की जाये, महिला बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव एवं यूनियन के बीच की गई 9 सूत्री मांगों पर जो लिखित सहमति बनी थी, उसे अविलम्ब लागू किया जाये शामिल है।

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