पत्थलगड़ी के खिलाफ दुष्प्रचार ना करे सरकारः बंधु तिर्की

पूर्व मंत्री और झाविमो नेता बंधु तिर्की ने कहा कि सरकार को आदिवासी संस्कृति और परंपरा की जानकारी नहीं है। झारखंड में पत्थलगड़ी एक परंपरा है और फिलहाल पत्थलगड़ी के माध्यम से जो संविधान की जानकारी ग्रामीण जनता को दी जा रही है, उसमें कहीं कोई गलत नहीं है। बंधु तिर्की ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि झारखंड पांचवी अनुसूची के तहत आता है, जिसके तहत कई संवैधानिक प्रवधान आदिवासियों के लिए की गई है। इसकी जानकारी ग्रामीण जनता को नहीं है, बस इन सब की जानकारी ग्रामीणों को पत्थलगड़ी के माध्यम से दी जा रही है।

झारखंड में तो यह भी परंपरा है कि एक चौहदी खत्म होने के बाद दूसरी चौहदी शुरू होने वाले स्थान पर भी पत्थलगड़ी की जाती है। जहां मृत व्यक्ति को दफनाया जाता है, वहां भी पत्थलगड़ी की जाती है। इसलिए सरकार विज्ञापन और होर्डिंग, पोस्टर के माध्यम से इसके खिलाफ दुष्प्रचार ना करे और भगवान बिरसा मुंडा के नाम को बदनाम ना करे। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने इन पोस्टरों को नहीं हटाया तो आदिवासी सड़क पर उतरकर इन पोस्टरों को उखाड़ फेकेंगे। सरकार में अगर दम है तो उनके खिलाफ केस करे उन्हें जेल में डाले। वो लोग जेल जाने को तैयार हैं।

बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड में जिस प्रकार से 12 साल में जनी शिकार होता है, उसी प्रकार से एक पीलीभीत जाने के बाद खूंट का आयोजन किया जाता है। इसके तहत डंगरी यानी की छोटी काली गाय की बलि दी जाती है, जिसमें आसपास के ग्रामीण जनता और विभिन्न मौजा के लोग हिस्सा लेते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए 17 फरवरी 2018 को बन होरा गांव में काली गाय की बलि दी जाएगी। यह भी आदिवासी परंपरा का हिस्सा है। अब सरकार इसे भी गलत नीयत से ना देखे। नहीं तो इसका अंजाम काफी गंभीर होगा। सरकार को भलिभांति झारखंड के आदिवासी परंपरा संस्कृति एवं साहित्य की जानकारी होनी चाहिए। अगर सरकार और सरकार में बैठे लोगों को इसकी जानकारी नहीं है तो वे कुर्सी छोड़ दें।

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