जहां कभी राजेन्द्र बाबू बैठते थे, वहां कांग्रेस नेताओं ने जूते फेंके

-पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी के साथ धक्का-मुक्की

बिहार कांग्रेस को हो क्या गया है। हर दिन फजीहत की नयी कहानी। हर दिन जूतम पैजारी। अब तो हद ही हो गयी। सदाकत आश्रम में नए निजाम में महागठबंधन टूटने के बाद कांग्रेस पार्टी में उठा आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को इस कलह का असर पार्टी बैठक में भी देखने को मिला। कलह के चलते उपजा विवाद तब और गहरा गया जब पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रतिनिधि सम्मेलन में वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष के समर्थकों के बीच हाथापाई हो गई।

इस हंगामें के बारे में बताते हुए कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि बैठक के शुरू होने के बाद वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष कौकब कादरी और पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी के समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं के पक्ष में नारेबाजी की। इस दौरान अशोक चौधरी के साथ धक्का-मुक्की की गई जिसके कारण दोनों पक्षों में विवाद हो गया। हंगामा बढ़ने के बाद सदाकत आश्रम के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई।

इधर, हंगामे के कारण पूर्व अध्यक्ष अशोक चौधरी और उनके समर्थकों ने सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया। सम्मेलन छोड़कर बाहर निकले पूर्व अध्यक्ष ने अपने समर्थकों के साथ मारपीट का आरोप लागते हुए पत्रकारों से कहा कि राजद के लोगों को बुलाकर पुराने कांग्रेसियों को पिटवाया गया है। चौधरी ने कहा कि प्रतिनिधियों की सूची जानबूझकर बदली गई है और दूसरी पार्टियों से आए लोगों को पैसा लेकर प्रतिनिधि बनाया गया।

उन्होंने कहा कि पार्टी को तोड़ने की कोशिश की जा रही है और वो इसकी शिकायत शीर्ष नेतृत्व से करेंगे। वहीं कार्यकारी अध्यक्ष ने पत्रकारों से कोई बात नहीं की, परंतु उनके समर्थक नेता अखिलेश चौधरी ने सम्मेलन में किसी भी प्रकार का विवाद होने से इनकार किया। उन्होंने हाथापाई की बात का खंडन करते हुए कहा कि अशोक एक वरिष्ठ नेता है और कांग्रेस पूरी तरह से अनुशासित पार्टी है।

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