विधान परिषद और राज्यसभा सीटों को लेकर घमासान

बिहार में राज्यसभा और विधानपरिषद की खाली हो रही सीटों के लिए कुछ समय बाद चुनाव होना है. इन खाली हो रही सीटों पर प्रमुख दल अपने-अपने हिसाब से गोटी बिछाने में अभी से जुट गए हैं. समीकरणों का जाल अपनी जगह है, इसके अलावा पैरवीपुत्रों की कहानियां राजनीतिक परिदृश्य में तैर रही हैं. देखा जाये तो विधान परिषद की 11 सीटें तो लगभग क्लियर हैं लेकिन राज्यसभा की छठी सीट पर पेंच फंस रहा है. अपने सदस्यों के कारण कांग्रेस नेतृत्व की परेशानी बढ़ी हुई है खासकर अशोक चौधरी ने पार्टी आलाकमान को ऊहापोह की स्थिति में ला दिया है. यदि सदस्य एकजुट रहे तो राज्यसभा और विधान परिषद में कांग्रेस को एक-एक सीट का फायदा होगा.

उम्मीदवारों की भीड़ को देखते हुए सदस्यों का चयन मुश्किल जान पड़ता है. जदयू से संजय सिंह, चंदेश्वर चंद्रवंशी, उपेंद्र प्रसाद, राजकिशोर कुशवाहा में से किसी दो ही को अवसर मिल पाने की सम्भावना है. नीतीश कुमार अपनी सीट बरकरार रखेंगे, वहीं भाजपा से सुशील मोदी और मंगल पांडे का जाना तय है. अभी राज्यसभा में जदयू की 3 सीट है, जबकि उसे दो ही मिलने की संभावना है. भाजपा को 2 सीटों में एक ही मिलने की संभावना है. राजद को 2 सीट मिलने की संभावना है. इस तरह जदयू और भाजपा को एक-एक सीट का नुकसान होता दिख रहा है.

विधान परिषद में अभी जदयू के पास 5 सीट है, लेकिन उसे तीन ही मिलता दिख रहा है. भाजपा को चार में दो ही मिलता दिख रहा है. राजद के पास एक सीट थी, लेकिन उसे चार मिलने की संभावना है. कांग्रेस के पास कोई सीट नहीं थी, लेकिन उसे 1 सीट मिलने की संभावना है. इस तरह विधान परिषद में जहां जदयू को 2 सीटों का नुकसान होगा, भाजपा को 2 सीटों का नुकसान हो रहा है, वहीँ राजद को 3 सीटों का और कांग्रेस को 1 सीट का फायदा होता दिख रहा है.

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