किसानों का ऐलान, नहीं होगी शहरों में सब्जी, फल, दूध की सप्लाई

किसानों के नाम पर सियासत करने वाली पार्टियां, कर्ज नहीं चुका पा रहे किसानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कह रही हैं। उधर किसान अपने उत्पाद का सही कीमत नहीं मिलने से हलकान हैं। पर सरकारें य बात मानने को तैयार नहीं हैं, अब किसानों ने एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ ली है, तो व्यवस्था चरमराना तय है। बताया जा रहा है कि सहकारी बैंकों का कर्ज नहीं चुका पाने के कारण किसानों पर पंजाब सरकार की ओर से कार्रवाई की बात कही गई है। इसके जवाब में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के किसानों ने 1 से 10 जून तक अपने गांव को सील करने और शहरों में सब्जियां, फल और दूध की सप्लाई रोकने का ऐलान किया है। चंडीगढ़ में बुधवार को जुटे किसान नेताओं ने यह ऐलान किया है। किसानों के इस आंदोलन की अगुवाई राष्ट्रीय किसान महासंघ कर रहा है। इस संगठन के अंदर में देशभर के 110 किसान संगठन आते हैं।

इतना ही नहीं किसानों ने ऐलान किया है कि किसान गांव के बाहर शहर नहीं जाएंगे। तीनों राज्यों में गांवों की सीमा को पूरी तरह सील कर दिया जाएगा। उनका कहना है कि सरकारें वादाखिलाफी कर रही हैं। एमएसपी को बढ़ाया नहीं जा रहा है, जिसके चलते किसानों को सीधा नुकसान हो रहा है। किसानों के इस आंदोलन को बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा का भी समर्थन है।

किसानों का कहना है कि लंबे समय से स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही है। सभी राज्य सरकारें अन्य सेक्टर के लोगों पर पैसे खर्च करती है, लेकिन किसानों की बेहतरी पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। मजबूर होकर किसानों ने शहरों में सब्जियों, दूध और फल की सप्लाई रोकने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा, 'हर महीने 20 बड़े किसानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी और इस बार उन 20 किसानों को शामिल किया गया है, जिन पर इस समय 10-12 करोड़ रुपये का बकाया राशि है.

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