पूर्व सीएम सरकारी बंगलों से होंगे बेदखल!

पूर्व सीएम के बंगले को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार अपना दो टूक फैसला सुना ही दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिये आवास सुविधा को समाप्त कर दिया है। बताया जा रहा है कि इसके बाद अखिलेश सहित सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने होंगे।

बता दें कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन आवास उपलब्ध कराने के नियम को रद्द कर दिया था। लेकिन तब यूपी की तत्कालीन अखिलेश सरकार ने नया कानून लाकर इसकी गुंजाईश बना ली थी। अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास सुविधा से वंचित कर दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के कानून को अमान्य घोषित किया।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि एक्ट का सेक्शन 4(3) असंवैधानिक है। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद जिन पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने बंगले खाली करने होंगे, उनमें मुलायम सिंह यादव, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, बीएसपी प्रमुख मायावती, राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और अखिलेश यादव शामिल हैं। इन्हें दो महीने के अंदर सरकारी आवास को छोड़ना होगा।

ध्यान रहे कि इस अधिकार को गैरकानूनी मानते हुए ‘लोक प्रहरी’ नामक एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में अगस्त 2017 में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। याचिका में मांग की गई थी कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र सरकारी खर्च पर इस तरह के बंगले देना गैरकानूनी है। इस पर हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में उसका पक्ष जानना चाहा था। उधर, पूरे देश में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को अमल में लाया जा सकता है। झारखंड में भी बाबूलाल मरांडी, शिबू सोरेन, अर्जुन मुंडा, हेमंत सोरेन, सुदेश महतो, मधु कोड़ा ऐसे नेता हैं जिन्हें सरकारी आवास मिला है।

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