ADG पर FIR का आदेश, अब आगे क्या !

राज्यसभा चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों को चुनाव आयोग ने सही पाया था. राज्य सरकार ने चुनाव आयोग से इस फैसले पर पुनर्विचार की अपील भी की थी. चुनाव आयोग ने तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार के आग्रह को ठुकरा दिया, यानि आयोग को लगा कि चुनाव में गडबडी की गयी थी. अब जाकर राज्य सरकार ने तकरीबन 2 साल में एडीजी स्पेशल ब्रांच अनुराग गुप्ता पर कार्रवाई की है. आखिरकार राज्य सरकार ने भी मान ही लिया कि चुनाव में गड़बड़ी हुई थी, एजी के तमाम दलील भी इसे सही नहीं ठहरा पाए.

अब यहाँ से बड़ा सवाल उठ खड़ा होता है. अगर चुनाव की प्रक्रिया में गड़बड़ी थी, अगर राज्य सरकार की मशीनरी ने धांधली की तो इसका फायदा किसे मिला! आखिरकार एडीजी अनुराग गुप्ता तो उम्मीदवार थे नहीं, चुनाव आयोग के दंड के अनुसार वो किसी को गलत फायदा पहुंचा रहे थे. आखिर किसे! तब राज्यसभा के लिए भाजपा ने दो उम्मीदवार उतारे थे. पहले उम्मीदवार थे मुख्तार अब्बास नकबी जो अभी केन्द्रीय मंत्री हैं और दुसरे उम्मीदवार थे भाजपा के तत्कालीन कोषाध्यक्ष महेश पोद्दार. नकबी की जीत के लिए तो पार्टी के पास पर्याप्त विधायक थे. जो भी धांधली हुई वो महेश पोद्दार के लिए हुई. ऐसे में चुनाव आयोग का यह कदम क्या श्री पोद्दार की जीत पर सवाल नहीं उठाता! ऐसे में कुछ लोग पीआईएल की तैयारी भी कर रहे हैं, ताकि महेश पोद्दार के निर्वाचन को चुनौती दी जा सके.

झारखण्ड हाईकोर्ट के कई वकील महेश पोद्दार की जीत पर सवाल उठाते हैं. इनलोगों का मानना है कि प्रक्रिया की गड़बड़ी का लाभ किसे मिला! यह देखना जरुरी है. आनेवाले दिनों में झारखण्ड का एकजुट विपक्ष भी 2016 के राज्यसभा चुनावों में हुई गड़बड़ी के कारण महेश पोद्दार के निर्वाचन पर सवाल उठा ही सकता है, इससे राज्यसरकार की और किरकिरी होनी निश्चित है.

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