कुशवाहा की शिक्षा सुधार राजनीति

रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा शिक्षा सुधार की नई सियासी पेशकश के साथ 30 जनवरी को बिहार में फिर दिखेंगे. इस बार उनका एजेंडा है शिक्षा में सुधार, मानव कतार.

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को बिहार के हर पंचायत में कम से कम एक स्कूल में गांव के लोगों और रालोसपा के कार्यकर्ताओं की मानव कतार लगेगी. इस मानव कतार के जरिए कुशवाहा बिहार के हर पंचायत में ताकतवर सियासी दस्तक देंगे लेकिन सियासत का चेहरा समाज सुधार के जरिए होगा. कुशवाहा पहले से शिक्षा सुधार की बात करते रहे हैं. पटना के गांधी मैदान में भी उन्होंने शिक्षा को केंद्रीय मुद्दा बनाकर एक बड़ी रैली की और अपनी सियासी ताकत दिखा दी. 30 जनवरी को यह ताकत पूरे बिहार में दिखेगी और इस कार्यक्रम के जरिए उपेंद्र कुशवाहा यह भी साबित कर देंगे कि वह बिहार के जननेता हैं. हर पंचायत के कम से कम एक स्कूल में लगने वाली मानव कतार की एक खासियत होगी, यहां न बच्चों की भीड़ होगी और ना शिक्षक होंगे.

अमूमन राजनेताओं के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए बच्चों और शिक्षकों की भी अनचाही परेड हो जाती है. मानव कतार के जरिए रालोसपा यह बताने की कोशिश करेगी कि हर स्कूल में गठित शिक्षा समिति के भरोसे बिहार की शिक्षा को नहीं छोड़ा जा सकता.

रालोसपा का मानना है कि स्कूलों की प्रबंध समिति अपने उद्देश्य में सफल नहीं रही है, इसे सफल बनाना केवल सरकारों का काम नहीं है. गांव के लोगों को इसके लिए आगे आना होगा. मानव कतार का मकसद इसी विषय को लेकर जागरूकता फैलाना है. ऐसा पहली बार हो रहा है कि बिहार का कोई राजनेता शिक्षा सुधार के कार्यक्रम के साथ लोगों के बीच पहुंच रहा है. जाहिर है रालोसपा एक सियासी दल है तो राजनीति होगी.

इधर उपेंद्र कुशवाहा ने गुजरात के सवाल पर भाजपा के साथ रहने का फैसला किया है, वह गुजरात में कोई उम्मीदवार नहीं दे रहे.

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