हम में अमल करने की हिम्मत इसलिए कर रहेः अमित शाह

असम में एनआरसी द्वारा 40 लाख लोगों की नागरिकता को अवैध करार दिए जाने के बाद से ही पूरे देश में इसको लेकर सियासत शुरू हो गई है।
इस मामले को लेकर आज राज्यसभा में भी खूब हंगामा हो रहा है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मुद्दे पर कहा कि किसी के पास घुसपैठियों की पहचान करने की हिम्मत नहीं थी। जबकि पूर्व पीएम राजीव गांधी ने 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में कहा गया था कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें सिटीजन रजिस्टर से अलग करना चाहिए।
अमित शाह ने कहा कि इस समझौते के बावजूद राजीव गांघी इसे करने की हिम्मत नहीं कर पाए। हम में अमल करने की हिम्मत है, इसलिए हम यह कर रहे हैं। एनआरसी का काम सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है।
अमित शाह ने कहा, ‘‘किसी ने एनआरसी का मूल कहां है, ये नहीं देखा। इसकी भी चर्चा इस सदन में होनी चाहिए। असम के अंदर जो समस्या हुई थी, उसे लेकर बड़ा आंदोलन हुआ। सैकड़ों छात्र शहीद हुए। आंदोलन काबू के बाहर गया तो तब के पीएम राजीव गांधी ने 14 अगस्त को 1985 को असम समझौता किया और 15 अगस्त को लाल किले से इसे घोषित किया। क्या थी इस समझौते की आत्मा? उसकी आत्मा में एनआरसी था। इसमें कहा गया था कि अवैध घुसपैठियों को पहचान कर उन्हें अलगकर एक नेशनल सिटीजन रजिस्टर बनाया जाएगा। यह आपके ही (कांग्रेस) प्रधानमंत्री की देन है।’’
अमित शाह के इस बयान पर कांग्रेस, टीएमसी सहित पूरा विपक्ष हंगामा करने लगा।

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