क्या झारखंड से खाली हाथ लौटे भाजपा महामंत्री डॉ अनिल जैन!

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. अनिल जैन का तीन दिवसीय झारखंड दौरा खत्म हो गया। इस दौरे से उन्हें हासिल क्या हुआ, यह तो वही जानें, पर उनकी बैठकों से झारखंड भाजपा की अंदरूनी खींचतान कम होगी, यह नहीं कहा जा सकता। जानकारों की मानें तो राष्ट्रीय महामंत्री बस आए और गए। पुख्ता कुछ भी लेकर नहीं गए। पर जो कुछ भी लेकर गए वह भी पार्टी आलाकमान के लिए स्पष्ट मैसेज है। यह आने वाले तूफान से पूर्व की खामोशी है, क्योंकि ऐसा कहा जा रहा है कि डॉ. अनिल जैन को किसी भी पदाधिकारी ने कुछ कहा ही नहीं बस गोलमोल समझा दिया।

पार्टी की एक धड़े ने जहां उनसे दूरी बना ली तो वहीं दूसरा धड़ा जो राज्य के मुखिया जी का करीबी है उसने सब कुछ ठीक-ठाक है, ये ऊपरी बातें उन्हें समझा-बुझाकर चलता कर दिया। कहने के लिए तो डॉ. जैन ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह द्वारा दिए गए टास्क की समीक्षा की। झारखंड में इस दिशा में हुए प्रयासों की सराहना की, हर एक विधायक से उनके क्षेत्र में बूथ स्तर तक बनी कमेटी की जानकारी ली। हर पदाधिकारी से उनकी जिम्मेवारियों की विस्तृत जानकारी ली। पर सूत्रों की मानें तो ये सारी चीजें प्रायोजित थीं, पहले से तय था। ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे पार्टी के अंदर की खामियों को, कमियों को दूर कर मिशन 2019 की तैयारियों पर फोकस किया जाए, सरकार और संगठन के बीच बढ़ती खाई को पाटा जाए।

झारखंड के अहम राजनीतिक मुद्दों पर मंथन कर विरोधियों से निपटने की कवायद की जाए। ऐसे कई मुद्दे थे जिन पर चर्चा तो दूर किसी ने बात तक नहीं की। ऐसे में यह सोचना लाजिमी है कि आखिर कैसे पार्टी जमीनी स्तर तक मजबूत होगी, और विरोधियों से निपटेगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रीय महामंत्री के सामने एक तरह से खानापूर्ति की और अपने-अपने रास्ते चले गए, अब देखना दिलचस्प होगा कि महामंत्री के "अहम दस्तावेजों" पर पार्टी आलाकमान क्या रुख अपनाता है, उस पर कौन सी नई स्ट्रेटेजी बनाता है।

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