झूठ और भ्रम फैलाकर राजनीति करना चाहते हैं डॉ अजयः BJP

प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण प्रभाकर ने कहा है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों व अधिकारियों के खिलाफ मांडू थाने में आवेदन देकर अपने मानसिक दिवालिएपन का परिचय दिया है। डॉ अजय को न तो गरीबों की चिंता है और न ही मुख्यमंत्री पद की गरिमा का ख्याल है। उनका आवेदन भी विरोधाभासी और हास्यास्पद है, जिसमें उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि राजेन्द्र बिरहोर की मौत बीमारी से हुई।

श्री प्रभाकर ने कहा कि एक तरफ डॉ अजय आरोप लगाते हैं कि रामगढ़ जिले के राजेन्द्र बिरहोर की मौत भूख से हुई, वहीं उनके आवेदन में कई जगह पर यह भी कहा गया है कि चिकित्सा के अभाव में बीमारी से उसकी मौत हुई। डॉ अजय ने खुद स्वीकार किया है कि राजेन्द्र बिरहोर को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया था। अब डॉ अजय ही तय करें कि वह क्या कहना चाहते हैं।

श्री प्रभाकर ने कहा कि डॉ अजय ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों पर मिलीभगत और षड्यंत्र के तहत राजेन्द्र बिरहोर का जान मारने का हास्यास्पद आरोप लगाया है। यही नहीं डॉ अजय ने राज्य में हुई कई मौतों का कारण भी भूख बता दिया है। लेकिन अपने समर्थन में कोई तथ्य नहीं दे पाए हैं। लगता है कि वह चिकित्सा की पढ़ाई और पुलिस की ट्रेनिंग दोनों भूल कर कॉरपोरेट के एजेंट बन गए हैं, और मुख्यमंत्री तथा सरकार की छवि खराब करने के लिए राजनीतिक शगूफा छोड़ रहे हैं।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि डॉ अजय झूठ की राजनीति कर रहे हैं। राज्य में होने वाली किसी भी मौत को भूख से हुई मौत के रूप में प्रचारित करने की कांग्रेस तथा विपक्ष की आदत हो गई है। अब तक विपक्ष अपने किसी भी आरोप को साबित नहीं कर पाया है। हर बार विपक्ष झूठा साबित हुआ है।

श्री प्रभाकर ने कहा कि रघुवर दास के नेतृत्व में राज्य तेजी से विकास के पायदान पर आगे बढ़ रहा है। यह बात विपक्ष को नहीं पच रहा। राज्य सरकार इस बात के लिए पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है कि किसी की भी भूख से मौत न हो। विशेष परिस्थितियों के लिए पंचायत में अनाज रखने का निर्देश दिया गया है। यह निर्देश पहले ही दे दिया है कि अगर किसी के अंगूठे का निशान मशीन में काम न करे, तो उन्हें राशन से वंचित नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार ने जन वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार की पहल की है। पहले की तुलना अब अधिक प्रतिशत परिवारों को राशन मिल रहा है। राशन कार्ड की सूचियों का डिजिटलीकरण हुआ है और कार्डधारियों द्वारा खरीदे गए राशन की जानकारी अब सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

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