राहुल का भरोसा, अजेय बने डॉ अजय

कांग्रेस आलाकमान ने बेदाग छवि और बेहतरीन प्रवक्ता डॉ अजय कुमार को झारखण्ड कांग्रेस का कप्तान बनाकर एक साथ कई निशाने साध लिए हैं. इसमें कहीं दो राय नहीं कि डॉ अजय कुमार प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर चुनींदा नामों में शुमार थे, वहीं युवा और अपनी तेज तर्रार इमेज के कारण राहुल गांधी के करीब पहुंचने में कामयाब रहे हैं. वर्ना झाविमो से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले अजय कुमार का कांग्रेस की टिकट पर जमशेदपुर से सीट गंवाने के बावजूद एकबारगी कांग्रेस के नेशनल टीम में प्रवक्ता के रूप में जगह बनाना आसान नहीं था.

बहरहाल, डॉ अजय कुमार को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस आलाकमान ने सुखदेव भगत को लेकर काफी लम्बे समय से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप कर दिया है. देखा जाय तो अक्सर खेमेबाजी की वजह से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा है. कई बार तो पार्टी के अन्दर का कलह इतना बढ़ गया कि खुद आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा है. अभी हाल ही में सुखदेव भगत ने सुबोधकांत सहाय पर बिना अध्यक्ष की अनुमति के अन्य दलों के साथ सरकार विरोधी कार्यक्रम में हिस्सा लेने का आरोप लगाया था. जिसकी वजह से प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह को बाकायदा बयान जारी करना पड़ा कि अध्यक्ष की अनुमति के बगैर कोई भी गैर कांग्रेसी कार्यक्रम में नहीं जायेगा. पर इसके जवाब में सुबोधकांत सहाय को कैंपेन कमिटी का चेयरमैन और सुखदेव भगत को सदस्य बना कर पार्टी ने उन्हें हद में रहने की ताकीद दी है.

राजनीतिक जानकारों कि मानें तो डॉ अजय कुमार राज्य के सबसे अहम संसदीय क्षेत्र जमशेदपुर का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस इलाके से भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास और कैबिनेट मंत्री सरयू राय आते हैं. लिहाजा कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष अगर इस क्षेत्र का हो और पार्टी को जनता के बीच पैठ बनाने में यदि सफलता मिलती है तो अन्य इलाकों में भी इसका मनोवैज्ञानिक लाभ मिलेगा.
इसके साथ ही आलाकमान ने जिस प्रकार संगठन को धार देने की कोशिश की है यदि सचमुच उसपर पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अमल करते हैं तो कांग्रेस की पकड़ जमीन पर भी मजबूत होगी और खोया जनाधार भी हासिल कर पायेगी.

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